पुणे भूस्खलन: मरने वालों की संख्या 41

  • 31 जुलाई 2014
भीमशंकर में भूस्खलन (तस्वीर नितिन लवाटे) Image copyright Nitin Lawate

महाराष्ट्र के पुणे ज़िले के एक आदिवासी गांव में बुधवार सुबह आए भूस्खलन के मलबे में दब कर मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है.

अब तक आठ लोगों को ज़िंदा निकाला जा चुका है. राहत और बचाव कार्य जारी है. लेकिन ख़राब मौसम के कारण राहतकर्मियों को दिक़्क़त का सामना करना पड़ रहा है.

अधिकारियों के मुताबिक़ 35 से 40 घर ध्वस्त हुए हैं और 150 से 200 लोग फंसे हुए हैं.

पढ़िए घटना की पूरी जानकारी

यह हादसा पुणे से क़रीब 100 किलोमीटर दूरी पर आंबेगांव तालुका में स्थित मालीण गांव में हुआ.

तड़के क़रीब तीन बजे पहाड़ी का एक हिस्सा टूट कर गिर गया. उस समय लोग सो रहे थे और घंटों के बाद अधिकारियों की इसकी सूचना मिल सकी.

एक स्थानीय बस ड्राइवर ने जब पाया कि मालीण गंवा को जोड़ने वाली सड़क दिखाई ही नहीं दे रही है, तब उसने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों की मौत को दुखद कहा है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह घटनास्थल का दौरा करेंगे.

गांव के एक स्कूल को छोड़कर लगभग सबकुछ या तो बह गया है या मलबे में दबा हुआ है.

लोग सो रहे थे

पुणे के विभागीय आयुक्त प्रभाकर करंदीकर ने बताया, "भारी बारिश की वजह से पहाड़ी का हिस्सा टूटकर गिरा है. रात का समय होने की वजह से सभी लोग अपने घर में थे. यह पूरा आदिवासी गांव है और काफ़ी दुर्गम है. हमने जेसीबी और एंबुलेंस भेजी थी. लेकिन उन्हें मौक़े पर पहुंचने में दिक़्क़त आ रही है.''

इस इलाक़े में पिछले दो-तीन दिनों से तेज़ बारिश हो रही है और क़रीब के गांववालों का कहना है कि सुबह तीन बजे के आस-पास एक तेज़ आवाज़ से उनकी नींद टूटी. कुछ गांव वालों ने कहा कि उन्हें लगा कि कोई शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ है.

पास की एक पहाड़ी गांव पर गिर गई और कुछ ही देर में 150-200 लोगों का गांव हज़ारों टन मिट्टी, कीचड़ और पत्थर के मलबे में दब गया.

गांव के ज़्यादातर मकान कच्चे थे जिनके कारण गांव वालों को निकलने का मौक़ा नहीं मिल सकता.

निकलने का मौका नहीं

Image copyright AFP

एनडीआरएफ़ के आईजी संदीप राय राठौर ने बीबीसी बताया कि उन्हें घटना की जानकारी सुबह 10.45 बजे मिली.

पतली सड़क और लगातार हो रही बारिश के कारण बचाव कार्यों में काफ़ी परेशानी हो रही है.

दुर्घटना के 12 घंटों से ज़्यादा गुज़र जाने के बाद भी बचावकर्मी मलबे के अंदर दबे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अब जबकि रात हो चुकी है, इन हालात में किसी के ज़िंदा बचे होने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है.

एक स्थानीय अधिकारी सौरभ राव ने पीटीआई को बताया कि भारी मशीनें और एम्बुलेंस को गांव भेजा गया है.

राव के अनुसार अभी मारे जाने वालों की संख्या बताना मुश्किल है क्योंकि प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में है.

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