जब नाग पंचमी के दिन दंगल में उतरे पहलवान

नाग पंचमी के दिन कानपुर में कुश्ती प्रतियोगिता इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

कानपुर में नाग पंचमी के दिन दंगल आयोजित किए जाने की पुरानी परंपरा रही है.

गुरुवार को नाग पंचमी के दिन कानपुर के कई अखाड़ों में कुश्ती की प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं.

(सुशील कुमार ने रचा इतिहास)

कानपुर के इतिहासकार मनोज कपूर कहते हैं कि जब अंग्रेज़ कानपुर में आ कर बसे थे तो शहर का विकास शुरू हुआ.

इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

अंग्रेजों ने यहां मिलें लगाईं जिनमें कानपुर के आस-पास के गाँवों के लोगों को काम मिला और वे लोग यहीं आकर बस गए.

(गुरु-चेले का नया रिश्ता)

चूंकि कुश्ती गाँवों में प्रचलित थी तो कानपुर में आकर बसे लोगों ने यहाँ भी अखाड़े खोल लिए.

इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

यही कारण है कि कानपुर के पुराने इलाक़े जैसे कि लाठी मोहाल, कुली बाज़ार इलाक़ों में ज्यादातर अखाड़े हैं जहाँ बाहर के लोग सबसे पहले आकर बसे.

(भारत में कुश्ती के रंग)

कुछ अखाड़े गंगा किनारे जैसे सत्ती चौरा घाट और भगवत दास घाट में भी है.

इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

लेकिन सवाल उठता है कि नाग पंचमी और दंगल का क्या संबंध है?

(कुश्ती के अखाड़े में पहलवानों का मेला)

मनोज कपूर कहते हैं कि आज से सौ डेढ़ सौ साल पहले मनोरंजन के कोई साधन तो थे नहीं.

इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

नाग पंचमी त्योहार के कारण छुट्टी का दिन होता था और त्योहार भी इतना बड़ा नहीं कि लोग सारा दिन व्यस्त रहे.

जैसे कि होली या दिवाली में के दिन होता है. अब सारा दिन करें तो क्या करें? तो दंगल आयोजित करवाए जाने लगे.

इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

दंगलों का आकर्षण बढ़ाने के लिए बड़े इनाम रखे जाने लगे.

एक समय था जब हज़ारों लोग कुश्ती मुक़ाबलों को देखने के लिए के लिए उत्सुक होते थे.

इमेज कॉपीरइट ROHIT GHOSH

लेकिन बदलते समय के साथ लोगों की दिलचस्पी दंगलों में काम होने लगी है.

पहले रेडियो फिर टीवी लोगों के मनोरंजन का साधन बन गए. कई अखाड़े बंद हो गए.

लेकिन जो अखाड़े बचे हैं, उनमें आज भी नाग पंचमी के दिन रौनक़ लौट आती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)