झारखंड: उड़ने को बेताब तीन जहाज़

झारखंड फ़्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर

झारखंड के युवाओं की विमान उड़ाने की चाह अब तक सपना ही बनी हुई है जबकि फ्लाइंग प्रशिक्षण के लिए राज्य सरकार ने तीन नए जेलिन विमान खरीदे हैं.

इनके रख-रखाव और इंजीनियरों, कर्मचारियों के वेतन पर सालाना तकरीबन एक करोड़ रुपए खर्च होते हैं.

राज्य के मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती कहते हैं कि ढाई साल से फ्लाइंग प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के तमाम प्रयास अब तक सफल नहीं हो सके हैं, जबकि कुछ महीनों में यह काम हो जाना चाहिए था.

इस देरी के लिए वह नागरिक उड्डयन निदेशालय (डीजीसीए) के रवैए को जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं, "एक के बाद एक अड़चन बताकर हमें परेशान किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.''

इस बारे में डीजीसीए का पक्ष जानने के प्रयास किए गए, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

'सपना ही रह गया'

चक्रवर्ती कहते हैं कि एक महीने में प्रशिक्षण केंद्र और उड़ान परीक्षण की अनुमति नहीं मिली, तो वह डीजीसीए के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराएंगे और राज्य सरकार को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई का दावा करेंगे.

इंजीनियिंरग के छात्र शशि कहते हैं कि करियर के लिहाज से राज्य में सरकारी फ्लाइंग प्रशिक्षण केंद्र संभावनाओं का द्वार हो सकता था, लेकिन छात्र इसका लाभ नहीं उठा सके. दरअसल यह प्रशिक्षण महंगा है, लिहाजा दूसरे राज्यों या निजी प्रशिक्षण केंद्र में जाना सबसे वश की बात नहीं.

झारखंड छात्र संघ के एस अली कहते हैं कि इस क्षेत्र में यहां संभावनाएं बहुत हैं, लेकिन प्रशिक्षण केंद्र न होने से छात्रों के एक बड़े तबके के लिए यह सपना जैसा रह गया है.

राज्य सरकार की दुमका में भी फ्लाइंग प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना थी, लेकिन वह भी अधर में है.

राज्य सरकार का कल्याण विभाग झारखंड के जनजातीय युवकों को पायलट प्रशिक्षण दिलाने के लिए दूसरे राज्यों में भेजता रहा है. अभी एक बैच के छात्र बिलासपुर समेत दो केंद्रों में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार