हिमाचलः विधानसभा में अब काग़ज़ नहीं उड़ेंगे

हिमाचल ई-विधानसभा

हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय विधानसभा, देश की पहली 'पेपरलेस' या काग़ज़मुक्त विधानसभा बन गई है.

विधायकों की मेज़ों पर लगाए गए टच-स्क्रीन कंप्यूटर पर पहले से ही सारी सूचनाएँ और जानकारियाँ उपलब्ध रहती हैं.

इस कंप्यूटर में सुपर-स्पीड वाला प्रोसेसर है, जिसमें सवाल और जवाब बारी-बारी से स्क्रीन पर आते रहते हैं.

इससे 80 साल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को दोहरा फ़ायदा मिला है. उनकी मेज़ के ऊपर एक यूज़र फ़्रेंडली बटन है और उनकी नज़र के हिसाब से एक बड़े फ़ोंट वाली टच स्क्रीन है.

जब वह जवाब देने के लिए खड़े होते हैं तो इस बटन को दबाने से उनकी मेज़ सुविधाजनक ऊंचाई तक आ जाती है.

वरिष्ठ मंत्री 87 साल की कांग्रेस नेता विद्या स्टोक्स या 73 वर्षीय विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटाली, सभी धीरे-धीरे इस तकनीक के साथ सामंजस्य बैठा रहे हैं.

इसके और भी फ़ायदे हैं. इसके ज़रिए हिमाचल प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष कागज़ों पर खर्च होने वाले 10 करोड़ रुपये बचने की उम्मीद है.

इससे करीब 6,096 पेड़ भी कटने से बच सकेंगे, जिससे यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा है.

लागत और बचत

ई-विधानसभा प्रोजेक्ट के प्रमुख और आईटी निदेशक धर्मेश शर्मा बताते हैं, "अब सब कुछ इलेक्ट्रॉनिकली हो रहा है. विधायकों के सवाल ऑनलाइन सीधे सरकारी विभागों को भेज दिए जाते हैं. वेब से जुड़े सिस्टम से जवाब भी मिल जाते हैं."

इस ई-विधानसभा प्रोजेक्ट की लागत 8.58 करोड़ रुपये है और इसके लिए धनराशि केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उपलब्ध करवाई थी.

विधानसभा अद्यक्ष कहते हैं, "अब समय आ गया है कि अन्य बड़े राज्य भी इसका अनुकरण करें. हम तकनीक का हस्तांतरण कर देंगे. काग़ज़ों का इस्तेमाल बंद कर भारत 200 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष बचा सकता है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार