'ध्यानचंद होते तो अवॉर्ड नहीं मांगते'

  • 13 अगस्त 2014
ध्यानचंद अपने साथी खिलाड़ियों के साथ इमेज कॉपीरइट www.bhartiyahockey.org

"ध्यानचंद होते तो कभी नहीं कहते कि मुझे ये अवॉर्ड दिया जाना चाहिए." 'हॉकी के जादूगर' नाम से मशहूर ध्यानचंद के बेटे और हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार ने गृह मंत्रालय की सिफ़ारिश के बाद ये बात कही है.

हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि मौजूदा सरकार अपने विवेक से उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने का फ़ैसला लेगी.

(ध्यानचंद को भारत रत्न देने की सिफारिश)

इससे पहले केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजुजु ने बताया कि इस साल के 'भारत रत्न' के लिए हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम की सिफ़ारिश की गई है.

इसके बाद बीबीसीसे बातचीत में अशोक कुमार ने कहा, "बात रिकमेंडेशन से ही आगे बढ़ती है और तभी कार्रवाई होती है. पिछली बार भी ऐसा सुनने में आया था. हम खुश थे कि उस वक्त खेल मंत्रालय ने ध्यानचंद दादा का नाम पीएमओ को भेजा. लेकिन 48 घंटे के भीतर सारी चीजें बदल गईं. उससे हम सबको बेहद निराशा हुई."

अटकलें

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पिछले साल सचिन तेंदुलकर को ये सम्मान मिला था.

इस बारे में अशोक कुमार कहते हैं, "इसका अफ़सोस और तकलीफ़ हम सभी खिलाड़ियों को है. सारे देश को है. जैसा कि अब सुनने में आया कि गृह मंत्रालय की ओर से उनका नाम आया है. यदि ऐसा होता है तो हम उम्मीद करते हैं कि मौजूदा सरकार अपने विवेक से ध्यानचंद जैसे महानतम व्यक्तियों को सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करेगी."

सम्मान को लेकर विवादों के बारे में ओलंपियन अशोक कुमार कहते हैं, "ऐसा नहीं होना चाहिए. लता मंगेशकर एक ही पैदा हो सकती हैं. जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी विरले व्यक्तित्व हैं. ध्यानचंद जी खेल की दुनिया में सबसे ऊपर थे."

फ़ौजी आदमी

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लेकिन सवाल उठता है कि ध्यानचंद रहते तो वह ख़ुद क्या कहते.

इस सवाल पर अशोक कुमार कहते हैं, "वह फ़ौजी आदमी थे, वह कहते थे कि ध्यानचंद माँगने नहीं जाएगा. ये देश या खेल चलाने वाले लोगों का काम है कि मुझे कुछ दिया जाए या नहीं. वह होते तो कभी नहीं कहते कि मुझे ये अवॉर्ड दिया जाए."

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