तेलंगाना 'सर्वे': सरकार की मंशा पर सवाल

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हाल ही में अस्तित्व में आए भारत के 29वें राज्य तेलंगाना में नई सरकार 19 अगस्त को एक सर्वे कराने जा रही है.

ख़ास बात यह है कि तीन करोड़ 22 लाख की आबादी वाले इस राज्य में यह सामाजिक-आर्थिक सर्वे एक दिन में निपटाया जाना है.

आंध्र प्रदेश में नेल्लौर के पब्लिक स्कूल में वार्डन जॉन पॉल हैदराबाद से 60 किलोमीटर दूर अपने घर भुवनागिरी मंडल पहुंचने के लिए ट्रेन यात्रा पर दो हज़ार रुपए ख़र्च कर रहे हैं ताकि किसी भी हालत में वह इस सर्वे में शामिल हो सकें.

पॉल ने बीबीसी को बताया, "हमें नहीं पता कि इस सर्वे के मानक क्या हैं क्योंकि सरकार ने बहुत सारी चीज़ें अस्पष्ट रखी हैं, लेकिन कहा है कि सर्वे अनिवार्य है."

सवालों में सर्वे

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा है कि इस सर्वे का मक़सद राज्य सरकार की कल्याण योजनाओं के असली लाभार्थियों की पहचान करना है.

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मसलन, सरकार का कहना है कि राज्य में 84 लाख परिवार हैं, लेकिन राशन कार्ड एक करोड़ 20 लाख हैं.

एक आईटी कंपनी में मार्केटिंग एक्ज़ेक्यूटिव वेंकट पार्थसारथी कहते हैं, "जो कुछ जनगणना में हुआ है, सर्वे उसकी पुनरावृत्ति लगता है. सर्वे में बैंक खाता और संपत्ति का विवरण क्यों मांगा गया है? बतौर नागरिक हम पहले ही यह जानकारी दे चुके हैं."

पार्थसारथी कहते हैं, "क्या वाक़ई ये जानकारियां कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लिए ज़रूरी हैं. मंशा साफ़ नहीं है और इस पूरी प्रक्रिया का मक़सद भी साफ़ नहीं है."

राजनीतिक विश्लेषक और 'मेट्रो इंडिया' के संपादक ए श्रीनिवास राव कहते हैं, "बहुत सारे सवाल अनुत्तरित हैं. इसीलिए कई सवाल भी उठ रहे हैं. सरकार सीमांध्र के उन लोगों को अलग-थलग करने का प्रयास कर रही है, जो तीन-चार दशक पहले तेलंगाना में बस गए थे."

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