समाजवादी पार्टी का 'अमर प्रेम'

  • 19 अगस्त 2014
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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह ने छह अगस्त को पार्टी के पुराने नेता अमर सिंह को जनेश्वर मिश्रा पार्क के उद्घाटन के लिए न्योता देकर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी.

पंद्रह दिन भी नहीं बीते हैं और मंगलवार को अमर सिंह मुलायम से दूसरी मुलाक़ात करने के लिए लखनऊ पहुँच गए.

ज़ाहिर है कि इन दो मुलाक़ातों के बाद अमर सिंह की पार्टी में वापसी की चर्चा को वज़न मिल गया है.

लेकिन अमर सिंह नहीं चाहते कि इन मुलाक़ातों को राजनीतिक रंग दिया जाए.

'हंगामा है क्यों बरपा?'

अमर सिंह ने इस भेंट को लेकर चल रही अटकलों पर पत्रकार वार्ता में कुछ ऐसे प्रतिक्रिया दी, "हंगामा है क्यों बरपा, मुलाक़ात ही तो की है."

पुरानी कड़वाहट को भुलाकर अमर सिंह ने कहा कि उनके और मुलायम के भाई शिवपाल सिंह यादव के बीच नज़दीकियों में कोई कमी नहीं आई.

उन्होंने कहा, "आज भी पहले मैं शिवपाल जी के यहां नाश्ते पर गया, फिर मुलायम सिंह जी के यहाँ गया."

लेकिन अमर सिंह नहीं चाहते कि इस मुलाक़ात को राजनीतिक रंग दिया जाए. उन्होंने कहा, "मैं राजनीति में हूँ लेकिन राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूँ. मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है."

आज़म की परेशानी

वैसे अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में वापसी से अगर किसी को परेशानी होगी तो वह आज़म खान हैं.

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पार्टी का मुसलमान चेहरा माने जाने वाले आज़म छह अगस्त वाले प्रोग्राम में मौजूद नहीं थे. अमर सिंह के ही चलते आज़म ख़ान को मुलायम सिंह ने पार्टी से निकाल दिया था.

ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या आज़म ख़ान को एक बार फिर पार्टी छोड़नी पड़ेगी?

इधर आज़म ख़ान और मुलायम सिंह यादव के संबंध भी बहुत मधुर नहीं चल रहे हैं.

मायावती की आपत्ति

आज़म ख़ान शिया वक़्फ़ बोर्ड के चुनाव करवाना चाहते थे लेकिन मौलाना कल्बे जव्वाद के कहने पर सपा अध्यक्ष ने वे चुनाव रद्द करवा दिए.

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हाल ही में आज़म ख़ान के पक्ष में बोलते हुए बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने कहा था कि वह अपने ही दल में अकेले पड़ गए हैं.

सपा में आज़म ख़ान की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मायावती ने कहा कि सपा में आज़म की उपेक्षा निंदनीय है.

मायावती के बयान पर टिप्पणी करते हुए अमर सिंह ने कहा कि मायावती मुसलमानों की अगर इतनी हिमायती हैं तो सत्ता में आने पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मुख्यमंत्री बना दें.

संगठन की मुश्किलें

मुलायम-अमर की बढ़ती नज़दीकियों के बारे सपा के पूर्व प्रवक्ता शाहिद सिद्दीकी ने कहा, "समाजवादी पार्टी का संगठन बिखर गया है और सरकार भी बिखर रही है. वोट के लिए नहीं बल्कि ऐसी स्थिति को संभालने के लिए आज़म खान से ज़्यादा अमर सिंह काम आ सकते हैं. अमर सिंह साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल बखूबी कर सकते हैं."

आज़म ख़ान के छोटे होते हुए क़द को लेकर शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि मुलायम के लिए आज़म कल भी ज़रूरी थे और आज भी ज़रूरी हैं.

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