इंदिरा गांधी के हत्यारे 'कौम दे हीरे'?

इंदिरा गाँधी के शव के साथ उनके पुत्र स्वर्गीय राजीव गाँधी इमेज कॉपीरइट Getty

पंजाबी फिल्म 'क़ौम दे हीरे' भारत में रिलीज़ होने से पहले विवादों में घिर गई है.

पंजाब युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है, उनका कहना है कि फ़िल्म में कातिलों को नायक की तरह दिखाया गया है.

यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा ग़ांधी की हत्या करने वाले उनके अंगरक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह पर बनाई गई है.

निर्देशक रविंदर रवि का कहना है कि उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या की जांच करने वाले ठक्कर आयोग की रिपोर्ट और अदालती कार्यवाही के साथ साथ बेअंत सिंह और सतवंत सिंह के परिवारों के साथ लंबा वक्त बिताकर ये फिल्म बनाई है.

ये फिल्म भारत में 22 अगस्त को रिलीज़ होनी है जबकि विदेशों में यह पहले ही रिलीज़ हो चुकी है, पंजाबी फिल्में भारत के अलावा उत्तरी अमरीका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी रिलीज होती हैं.

रविवार को दिल्ली में गृह मंत्रालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों को फिल्म दिखाने के बाद निर्माता और वितरक अगले निर्देश का इंतज़ार कर रहे हैं.

ऐसी कई फ़िल्में

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फिल्म में बेअंत सिंह की भूमिका निभाने वाले राज काकड़ा का कहना है कि जब सेंसर बोर्ड ने फिल्म पास कर दी है तो फिर इस पर सवाल उठाना ठीक नहीं है.

बेअंत सिंह के 35 साल के बेटे सरबजीत सिंह ने फ़ोन पर बताया कि फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है और यह सिखों का इतिहास है.

पिछले साल 'साड्डा हक़' नाम की फिल्म पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या और उसके बाद सज़ायाफ्ता कातिलों के जेल तोड़कर भागने पर बनी थी.

आने वाले दिनों में, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एएस वैद्य की हत्या करने वाले सुक्खा-जिंदा पर बनी फिल्म इस कड़ी की अगली फिल्म हो सकती है.

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