भारत में चलेगा 'थिंकटैंक' योजना आयोग?

इमेज कॉपीरइट TWITTER

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योजना आयोग की जगह नई संस्था की स्थापना के लिए लोगों से सुझाव मांग रहे हैं.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “योजना आयोग की जगह लेने वाली नई संस्था की रूपरेखा पर अपने सुझाव भेजिए.”

हाल ही में नरेंद्र मोदी ने देश के विकास का प्रारूप तैयार करने वाली सबसे पुरानी संस्था योजना आयोग को खत्म किए जाने और उसकी जगह एक नई संस्था खड़ी करने का ऐलान किया था.

इस बीच योजना आयोग के पक्ष और विपक्ष में बहस तेज़ हुई है.

प्रधानमंत्री का कहना है कि वैश्विक वातावरण के साथ-साथ देश की आर्थिक परिस्थितियां भी बदली हैं.

इसी वजह से योजना आयोग की जगह एक नई रचनात्मक संस्था की ज़रूरत है जो संघीय ढाँचे को भी मज़बूत करने की दिशा में काम करे.

योजना आयोग को खत्म किए जाने के विरोध में

योजना आयोग की पूर्व सदस्या सईदा हामिद ने बीबीसी से कहा, “योजना आयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के लिए स्थापित किया गया था. उसे इस तरह से खत्म करने से बेहतर होता कि उसे एक नई दिशा दी जाती.”

भारत में अमरीका जैसी 'थिंकटैंक' या नीतिनिर्धारक संस्था स्थापित करने के इरादे पर सईदा का कहना था, "भारत एक बहुत ही जटिल देश है. यहाँ थिंकटैंक जैसी व्यवस्था काम नहीं कर सकेगी."

उन्होंने कहा, “देश में अब भी बहुत नाबराबरी है, जिस वजह से योजना आयोग का होना बेहद ज़रुरी है.”

उनके अनुसार, योजना आयोग ही एक ऐसा मंच था जहां सारे राज्यों, मंत्रालयों की भागीदारी थी. कई सेक्टर के आधार पर समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जाती थी.

उदाहरण के तौर पर वह बताती हैं, “जैसे महिला एवं बाल विकास किसी एक सेक्टर की जिम्मेदारी नहीं है. ये एक संयुक्त जिम्मेदारी है, अब इसे देखने की जिम्मेदारी योजना आयोग की थी.”

उनका कहना है कि बाल मृत्यु दर और अन्य कई क्षेत्रों में योजना आयोग ने जो काम किया है उसका परिणाम एक से दो साल में देखने को मिलेगा.

वक्त से साथ न बदल पाने के आरोप पर सईदा कहती हैं, “हमने कोशिश की लेकिन ये धीरे-धीरे होने वाला बदलाव है. हमारी काशिश थी कि वर्तमान के आधार पर हम बदलाव लाएं. इस बदलाव के लिए राज्य स्तर पर पहल और भागीदारी की सबसे ज्यादा ज़रुरत थी. इसके लिए कोशिश भी की गई.”

योजना आयोग को खत्म किए जाने के पक्ष में

अर्थशास्त्री और योजना आयोग के सदस्य रहे सोमपाल शास्त्री ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा है कि मौजूदा परिवेश में आयोग की हैसियत एक डाकखाने जैसी हो कर रह गई थी.

ऐसा इसलिए कि अमूमन आयोग, मंत्रालयों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को हल्का फुल्का ठीक-ठाक करके ही योजनाएं बनाने का काम करने लगा था.

सोमपाल शास्त्री के अनुसार आयोग का मुख्य काम था देश के संसाधनों का आकलन करना और उनके अनुरूप योजनाएं बनाना, जो नहीं हो पाया.

उनके अनुसार, रोज़गार पैदा करने वाले संसाधनों की तलाश में भी आयोग विफल रहा और पूरे संगठित क्षेत्र में सिर्फ 9 प्रतिशत रोज़गार ही सृजित हो पाया.

सोमपाल शास्त्री का कहना है कि जो भी नई संस्था बनाई जाए उसमें ऐसे लोगों को रखा जाना चाहिए जिन्हें भारत की सामाजिक स्थिति, भारत की व्यवस्था और अर्थव्यवस्था की सही जानकारी हो.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार