आईआईटी दाख़िले का गुणाभाग है गणित यहां

  • 21 अगस्त 2014
मंजुल भार्गव Image copyright AFP
Image caption भारतीय मूल के गणितज्ञ मंजुल भार्गव को हाल ही में फील्ड्स मेडल पुरस्कार से नवाजा गया

हाल ही में गणित के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए चार लोगों को फ़ील्ड्स मेडल से नवाज़ा गया. फ़ील्ड्स मेडल को गणित का नोबेल कहा जाता है.

जो विजेता गणितज्ञ सुर्खियों में रहे, वे हैं भारतीय मूल के कनाडाई मंजुल भार्गव, ईरान की मरयम मिर्ज़ाख़ानी और ब्राज़ील के आर्तर अविला.

अविला और मिर्ज़ाख़ानी को पुरस्कार उनके देशों की अच्छी शैक्षणिक व्यवस्था की देन है, लेकिन मंजुल के साथ ऐसा नहीं है.

भारत में गणित के हाल पर एक विश्लेषण

Image copyright AFP
Image caption मरयम मिर्ज़ाखानी फील्ड्स मेडल पाने वाली पहली महिला हैं

फ़ील्ड्स मेडल हासिल करते ही भारतीय मीडिया उनके भारतीय होने का दावा करने लगा, वहीं मंजुल को अच्छी तरह पता है कि भारत में गणित की स्थिति क्या है.

भारत की शैक्षणिक व्यवस्था पर हाल ही में दैनिक अख़बार 'बिज़नेस स्टैंडर्ड' के संपादकीय 'व्हाई मैथ्स मैटर्स' में इसकी झलक मिलती है.

भार्गव के हवाले से संपादकीय कहता है, "मेरी जानकारी में भारत में गणित को एक विषय या करियर के रूप में नहीं पढ़ाया जाता. यह इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग के पेशे के लिए औज़ार के रूप में इस्तेमाल होता है."

Image copyright AFP
Image caption मंजुल भार्गव मानते हैं कि गणित में रचनात्मकता है और यह पेंटिंग की तरह है

यह ख़राब अध्यापकों, जीवन और सीखने के प्रति अत्यधिक उपयोगितावादी रवैया रखने वाले समाज का चिरपरिचित गठजोड़ है.

संपादकीय कहता है, "प्योर मैथमैटिक्स कितनी भी काल्पनिक क्यों न लगती हो, इसमें अभी या बाद में व्यावहारिक उपयोगिता की प्रवृत्ति होती है... हाल में मिले पुरस्कारों का सिलसिला और प्योर मैथमैटिक्स में शोध के लिए दिए जा रहे पुरस्कार बताते हैं कि दुनिया यह समझने लगी है कि यह कितनी अहम है."

गणित पर निर्भर है तकनीक

Image copyright spl

दुनिया तकनीक पर निर्भर है और तकनीक गणित पर. गणित जो कि समझने में कठिन या काल्पनिक लगती है अचानक अनिवार्य बन सकती है.

जन्मजात प्रतिभा को निखारकर और प्योर मैथमैटिक्स में शोध के लिए उपयोगी माहौल देकर इसे एक मिशन के रूप में बदला जा सकता है जो कि सभ्यता के लिए क्रांतिकारी होगा.

हालांकि उपयोगिता का यह तर्क देश में गणित पढ़ाने के लिए ज़्यादा निवेश करने के लिए अच्छा प्रतीत होता है.

इससे यह भी लगता है कि महान गणितज्ञ तैयार करना कुछ वैसा ही है जैसा कि लोगों को इनवेस्टमेंट बैंकिंग के लिए आकर्षित करना.

इसी संदर्भ में भार्गव के इंटरव्यू को देखना होगा.

रचनात्मक कला है गणित

Image copyright AFP

भार्गव कहते हैं, "मैंने हमेशा से पाया है कि तीन विषय, संगीत, कविता और गणित लगभग एक जैसे हैं. वास्तव में मैंने पाया है कि मैं तीनों के बारे में एक ही तरह से सोचता हूं. स्कूल में, गणित को आमतौर पर 'विज्ञान वर्ग' में डाला जाता है. लेकिन गणितज्ञों के लिए यह संगीत, कविता या चित्रकला की तरह एक रचनात्मक कला है."

औसतन, गणित के मामले में भारतीय किसी दूसरे देश के लोगों से ज़्यादा या कम प्रतिभावान नहीं हैं.

लेकिन यदि ज़्यादा भारतीयों को दुनिया के श्रेष्ठ गणितज्ञों में शुमार होने का मौक़ा नहीं मिला तो इसकी बड़ी वजह हमारी शैक्षणिक व्यवस्था का ढांचा है - पाठ्यक्रम और समानता दोनों के मामले में.

हम मानते हैं कि छात्र एक ही रफ़्तार से सीखते हैं और गणित के मामले में तो सिर्फ़ एक ही तरीक़े से सीखने पर ज़ोर रहता है.

मुझे देशभर में कई माता-पिताओं ने बताया कि उनके बच्चे को इसलिए दंडित किया गया क्योंकि उसने गणित के सवाल को उस तरीक़े से हल नहीं किया था जैसा कि कक्षा में बताया गया था.

ढर्रा बदलना ज़रूरी

होना इसका उलटा चाहिए था, एक छात्र जिसने अपने तरीक़े से गणित के सवाल को सही हल किया, वह अधिक अंक पाने का हक़दार है.

गणित को लेकर शिक्षकों की भी यही मान्यता है कि जमे-जमाए ढर्रे पर चलकर पूर्वनिर्धारित नतीजे हासिल किए जाएं.

इस उलझन को दूर करने का तरीक़ा गणित के लिए ज़्यादा पुरस्कार और ईनाम की बड़ी रक़म नहीं है.

आख़िरकार गणित वहीं फलेगी-फूलेगी जहां बुद्धि की रचनात्मकता को बड़ी कंपनियों के ऊंचे ओहदों और मोटी तनख़्वाह हासिल करने वालों पर तरजीह मिलेगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं)

संबंधित समाचार