मेरठः तनाव के बावजूद नहीं बढ़ी दूरियाँ

मेरठ का सरावा गाँव पिछले कई दिनों से सुर्ख़ियों में है और तनाव में भी.

इसकी वजह वह आरोप है जिसके मुताबिक यहां के स्थानीय मदरसे में पढ़ाने वाली गाँव की ही एक युवती का जबरन धर्म-परिवर्तन कर उसके साथ बलात्कार किया गया.

इसके बाद इलाके में एक अजीब सा माहौल पनप गया है.

पढ़िए ये रिपोर्ट विस्तार से

सरावा गाँव के उस मदरसे में जहां युवती पढ़ाया करती थी, वहां के छात्र बहुत कम हो गए हैं. पहले इस मदरसे में आस-पड़ोस के मुसलमान परिवारों के करीब 200 छात्र पढ़ने के लिए आया करते थे.

लेकिन अब इनकी संख्या 50 के आस-पास रह गई है. बाक़ी के छात्रों के नहीं आने की वजह उनके परिवार के लोगों के दिलों में बैठा हुआ डर है. इन लोगों को लग रहा है कि मदरसे को कट्टरपंथी हिंदू निशाना बना सकते हैं.

हालांकि मदरसे के प्राध्यापक मौलाना अमीरुद्दीन का कहना है कि पीड़ित लड़की जब पढ़ाने आती थी तो उस दौरान न तो कोई उससे मिलने आता था और न उसने धर्म परिवर्तन की कोई बात कही.

सरावा गाँव अपने सदभाव के लिए मशहूर रहा है.

आपसी सद्भाव

जब वर्ष 1947 में भारत का विभाजन हुआ था और देशभर में दंगे भड़क गए थे तो मेरठ का यह इलाका शांत रहा था. यहाँ रहने वाले हिन्दू और मुसलमानों के बीच आपसी ताल्लुकात कभी बिगड़े नहीं थे और आज भी सब मिलजुल कर रहने की कोशिशों में जुटे हैं.

इस गाँव में त्यागी और मुसलमान सदभाव से रहते हैं और उसकी मिसाल ये है कि हिन्दू होने के बावजूद पीड़ित लड़की मदरसे में पढ़ाने जाती थी. यहाँ मदरसा, शिव मंदिर और मस्जिद एक दूसरे से लगे हुए ही हैं.

हालांकि लोगों का कहना है कि घटना के बाद सांप्रदायिक माहौल को ख़राब करने की कोशिश की गई मगर पुश्त दर पुश्त साथ रहते आ रहे लोगों ने सरावा में किसी तरह से माहौल को बिगड़ने नहीं दिया.

फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया से सेवानिवृत्त हुए गाँव के ही बाल किशोर त्यागी कहते हैं, "माहौल बिगाड़ने की पूरी कोशिश की गई. कुछ लोगों ने तो इस मामले को लेकर नेतागिरी चमकाने की कोशिश भी की. मगर सरावा के लोग अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट से मिले और अनुरोध किया कि प्रशासन नेताओं के आने और लोगों को भड़काने के प्रयास पर रोक लगाए."

पेचीदा है मामला

वैसे प्रशासन ने माहौल की नज़ाकत को देखते हुए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ी सरावा में तैनात कर दी है.

मदरसे में पढ़ाने वाली हिंदू लड़की के कथित धर्मपरिवर्तन और बलात्कार के मामले में पुलिस अभी तक चार लोगों को गिरफ़्तार कर चुकी है जिसमें गाँव के मुखिया भी शामिल हैं.

मगर पुलिस पर 'दबाव में काम' करने के आरोप लग रहे हैं क्योंकि एक अभियुक्त अभी तक पुलिस की गिरफ़्त से बाहर है.

लड़की के पिता ने बीबीसी से कहा कि पुलिस पांचवें अभियुक्त को दबाव में आकर गिरफ़्तार नहीं करना चाह रही है.

हालांकि पीड़ित लड़की के शुरुआती बयान और बाद में दिए गए बयान में विरोधाभास है जिसकी वजह से जांचकर्ताओं के लिए मामला पेचीदा होता जा रहा है.

'लव जिहाद'

इस बीच हिंदूवादी संगठनों का आरोप है कि 'धर्म परिवर्तन और बलात्कार लव जिहाद का हिस्सा है'.

'लव जिहाद' के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले सुरिंदर पहल का कहना है कि यह सिर्फ एक अकेला मामला नहीं है. उन्होंने कई उदाहरण गिनाते हुए कहा कि सुनियोजित तरीके से लड़कियों को 'प्रेमजाल में फंसाकर' उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और सरावा गाँव की घटना भी इसी का हिस्सा है.

लेकिन सच्चाई क्या है? इस पर से पर्दा अभी तक नहीं उठ पाया है क्योंकि जिस युवक को पीड़िता ने मुज़फ्फरनगर के अस्पताल में भर्ती होते समय अपना पति बताया था उस पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है.

इलाके के ही मणि प्रताप त्यागी का कहना है कि बयानों में विरोधाभास की वजह से पता नहीं चल रहा है कि असल मामला क्या है. मगर वह कहते हैं कि सरावा में सांप्रदायिक भेदभाव कभी नहीं रहा है.

एक सामाजिक मुद्दा उठा जिसने राजनीतिक सरगर्मी ज़रूर बढ़ा दी है. इससे सरावा के रहने वाले लोगों के आपसी संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है.

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