सोशल सरगर्मी: जेटली की माफ़ी है नाकाफ़ी!

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सोशल मीडिया अतिवादियों का अखाड़ा माना जाता है है. आज शाम ट्विटर के ट्रेंड ये बात साफ़ कर रहे थे.

आज के ट्रेंड में गुस्से का शिकार थे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड.

अरुण जेटली इसलिए क्योंकि उन्होंने कहा था कि 'दिल्ली की एक छोटी सी बलात्कार की घटना ने भारतीय पर्यटन का अरबों डॉलर का नुकसान किया.'

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बस फिर क्या था, ट्रेंड शुरू हो गए. #बिगमिनिस्टरस्मॉलरेप और #रेपस्मॉल4बीजेपी.

हालांकि अरुण जेटली ने बाद में इस टिप्पणी के लिए खेद जताया और कहा कि उन्होंने निर्भया मामले का ज़िक्र नहीं किया था. जेटली यह भी बोले कि उनका बयान 'तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया' लेकिन जो होना था वो हो गया.

सारिका ने ट्वीट किया, ''मोदी जी ने कहा था बलात्कार की घटनाओं का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण नहीं होनी चाहिए इसलिए जेटली जी उसका आर्थिक विश्लेषण कर रहे हैं?''

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पत्रकार हरतोष सिंह बल ने कहा, ''अरुण जेटली का कहना है कि बयान 'तोड़ा मरोड़ा' गया?? प्रभाव दिख रहा है, ज़्यादातर अख़बार इस मसले पर चुप थे. पीआईबी ने उनके भाषण का संपादित अंश ही जारी किया.''

दूसरी तरफ़ आज तीस्ता सीतलवाड ट्रेंड कर रही थीं. सीतलवाड लंबे समय से गुजरात के दंगा पीड़ितों के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रही हैं और घोर मोदी विरोधी के रूप में पहचानी जाती हैं.

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दरअसल सीतलवाड ने एक तस्वीर ट्वीट की थी जिसमें इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों के चेहरे कुछ हिन्दू देवी-देवताओं के धड़ पर हैं और वे चक्र या फ़रसा जैसे हथियार लिए हुए हैं. तीस्ता ने वो तस्वीर कुछ देर में डिलीट कर दी पर जिनको उसका स्क्रीनग्रैब लेना था उन्होंने ले लिया.

रही बात फ़ेसबुक की तो अब भी यहाँ पर इबोला वायरस, ग़ज़ा ट्रेंड कर रहे थे.

दरअसल फ़ेसबुक के ट्रेंड को देखकर लगता है कि उनका आधार अख़बारों और मीडिया संगठनों की ख़बरें ही होती हैं. आप उन्हीं लोगों की टिप्पणियां देख सकते हैं जो आपकी फ्रेंड लिस्ट में हैं या जिन्हें आप फ़ॉलो कर रहे हैं.

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