...तो इसलिए बेहाल हैं मुस्लिम देश!

  • 31 अगस्त 2014
ताहिरुल कादरी, नवाज़ शरीफ, इमरान खान इमेज कॉपीरइट AP

पाकिस्तानी मीडिया में दो मुद्दे लगातार छाए हैं. एक तो पाकिस्तान का सियासी संकट और दूसरा भारत से बातचीत टूटना.

औसाफ़ ने पाकिस्तान में जारी संकट में बतौर मध्यस्थ सेना प्रमुख की भूमिका को देश के हित में बताया है.

अख़बार कहता है कि जब इमरान ख़ान और ताहिरुल क़ादरी सेना प्रमुख से मिल रहे थे तो कहीं नए चुनावों की अटकलें लगाई जा रही थीं तो कोई नई सरकार बनाए जाने के क़यास लगा रहा था. लेकिन इनका सच से कोई वास्ता नहीं निकला.

अख़बार के मुताबिक़ जब राजनेता संकट को हल करने में नाकाम हो गए तो सेना को आगे आना पड़ा है.

पेशावर से छपने वाले रोज़नामा मशरिक़ का कहना है कि संकट को सुलझाने के लिए फ़ौज का दरवाज़ा खटखटाने से साफ़ है कि राजनेताओं को एक दूसरे पर तो भरोसा है ही नहीं बल्कि लोकतंत्र पर भी उनका विश्वास कम ही लगता है.

मुस्लिम देश

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दैनिक जंग ने इस हवाले से बड़ी तस्वीरें पेश करने की कोशिश की है. अख़बार लिखता है कि दुनिया के ज़्यादातर देश चुनाव और व्यवस्था से जुड़ी ख़ामियों के बावजूद तरक़्क़ी की राह पर बढ़ रहे हैं, जबकि सभी संसाधनों से संपन्न होने के बावजूद मुस्लिम देश मुश्किलों में घिरे हैं.

अख़बार की राय है कि मुस्लिम देशों में राजनेता अपने सियासी लक्ष्यों और इरादों को हासिल करने के लिए अफ़रा-तफ़री और हलचल पैदा करने वाले रास्तों को चुनते हैं, जिससे देश मुश्किल में घिरते हैं.

आजकल का इसी विषय पर कार्टून है जिसमें नवाज़ शरीफ़ और उनके साथी नदी में डूब रहे हैं जबकि परवेज़ मुशर्रफ़ एक ऊंचे से टीले पर बैठ कर मुस्करा रहे हैं.

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रोज़नामा दुनिया ने लिखा है कि कश्मीरी नेताओं से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाक़ातों पर भारत ने तूफ़ान खड़ा कर दिया.

अख़बार की राय है कि कश्मीर मसले में मुख्य पक्ष तो कश्मीरी हैं. ऐसे में अगर पाकिस्तान को कश्मीरियों के रुख़ की जानकारी नहीं होगी तो वे इस मुद्दे पर बातचीत कैसे करेगा.

कुछ ऐसी ही बातें जंग में छपे मलीहा लोधी के लेख में कही गई हैं जिसका शीर्षक है, "भारत की कलाबाजियां कोई नई बात नहीं."

'मंत्रियों के सपूत'

रुख़ भारत के उर्दू अखबारों का करें तो अख़बार-ए-मशरिक़ ने सवाल किया है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया मशविरे के बाद क्या प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रिमंडल से दागियों को चलता करेंगे?

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Image caption रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के बेटे पर बलात्कार के आरोप लगे हैं.

अख़बार ने नितिन गडकरी, निहाल चंद मेघवाल, उपेंद्र कुशवाहा और उमा भारती के नाम गिनाते हुए मोदी मंत्रिमंडल में कुल 14 मंत्रियों को दागी बताया है.

सियासत का संपादकीय है, 'केंद्रीय मंत्रियों के सपूत.' अखबार लिखता है कि जहां रेल मंत्री के बेटे के ख़िलाफ़ बलात्कार के मामले में गिरफ़्तारी वारंट जारी हुआ, वहीं गृह मंत्री अपने बेटे की ग़लत हरकतों के कारण चर्चा में है.

अख़बार कहता है कि सरकार का प्रमुख होने के नाते मोदी को अपने मंत्रियों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए वरना सियासी घाटा उठाने के साथ साथ वैचारिक दिवालिएपन की स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है.

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