छत्तीसगढ़: 'जीतने' नहीं, 'जिताने' की होड़

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रदर्शन

बस्तर के अंतागढ़ विधानसभा के लिए होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मंतूराम पवार की नाम वापसी के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है.

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने दबाव बना कर उनके उम्मीदवार का नामांकन वापस करवाया है, जबकि मंतूराम ने अपनी पार्टी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है.

13 सितंबर को होने वाले अंतागढ़ उपचुनाव में कुल तेरह उम्मीदवार मैदान में थे. लेकिन अप्रत्याशित घटनाक्रम में चुनाव से पहले ही कांग्रेस उम्मीदवार मंतूराम पवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया.

इसके बाद नामांकन वापसी के अंतिम दिन शनिवार को भाजपा ने निर्विरोध चुनाव जीतने के लिए कोशिशें शुरू की और एक-एक कर 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान से हट गए.

कैसे और क्यों हुआ ये नामांकन वापसी का नाटकीय घटनाक्रम, पढ़ें.

अब चुनावी मैदान में भाजपा के अलावा सिर्फ़ अंबेडकराइट पार्टी ऑफ़ इंडिया के रूपधर पुड़ो ही हैं. पुड़ो के भी नामांकन वापसी की ख़बरे गर्म थी, लेकिन पुड़ो अंतिम समय में निर्वाचन कार्यालय ही नहीं पहुंचे.

कांग्रेस ने मंतूराम पवार की नाम वापसी के बाद कोई चारा नहीं देखते हुए किसी निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन अब उसके पास यह विकल्प भी नहीं है.

सकते में कांग्रेस

छत्तीसगढ़ में राजनीति की इस नई चाल से कांग्रेस सकते में है.

पार्टी ने शनिवार को राजधानी रायपुर और कांकेर में इसके विरोध में प्रदर्शन किया, चुनाव आयोग का घेराव करते हुए उपचुनाव निरस्त करने की मांग की और आरोप लगाया कि भाजपा ने दबाव डालकर प्रत्याशियों का नामांकन वापस कराया है.

लेकिन अपना नामांकन वापस लेने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक मंतूराम कहते हैं, “मुझे जबरन टिकट दी गई थी और पिछले तीन चुनाव में मुझे हराने वाले पार्टी के लोग फिर से भाजपा के साथ मिल कर साज़िश कर रहे थे. इसलिये मैंने नामांकन वापस ले लिया.”

ख़रीद-फ़रोख़्त का आरोप

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि मंतूराम लोकतांत्रिक प्रणाली के 'हत्यारों' का मोहरा हैं और भाजपा ने उन्हें पैसे देकर ख़रीदा है.

शुक्ला का आरोप है कि छह निर्दलीय प्रत्याशियों का अपहरण किया गया और उन्हें बंदूक़ की नोक पर नामांकन वापस लेने के लिए बाध्य किया गया.

फ़िलहाल कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा की सीधी प्रतिक्रिया यही है कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है.

लेकिन मंतूराम और उन जैसे प्रत्याशियों के चुनाव मैदान में हटने का लाभ किसे मिलेगा, यह कोई छुपी हुई बात नहीं है और सवाल तो उस पर भी उठेंगे ही.

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