मोदी सरकार: 10 इरादे, जो धुंधले पड़े

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चुनाव प्रचार से सरकार बनाने तक भारतीय जनता पार्टी ने जनता से कई वादे किए. सरकार के बीते सौ दिनों में कई पूरे हुए, तो कई सरकार के दैनिक एजेंडे से धुंधले हो गए.

आइए एक नज़र डालते हैं ऐसे ही दस बड़े वादों पर.

1. मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की बातें करते हैं, लेकिन आम आदमी के लिए इसके क्या मायने होंगे, उसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है.

2. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जंग

भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में जनता को ‘भ्रष्टाचार मुक्त सरकार’ देने का वादा किया था.

हालांकि सत्ता में आने के सौ दिन बाद भी भ्रष्टाचार कम करने को लेकर कोई बड़े नीतिगत सुधार या क़ानून नहीं देखने को मिले हैं.

3. काले धन की वापसी

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बीजेपी नेता राजनाथ सिंह ने इस साल अप्रैल में दावा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो विदेशों में जमा काला धन 150 दिनों के भीतर भारत लाया जाएगा और वेलफेयर योजनाओं में लगाया जाएगा.

लेकिन अब बीजेपी के ही एक सांसद निशिकांत दुबे ने कह दिया है कि सरकार विदेशों में जमा काला धन नहीं ला पाएगी.

(पढ़िए - मोदी सरकार: 100 दिन, 10 बड़े क़दम)

काले धन पर विशेष जांच दल ज़रूर बनाई गई और दल ने अपनी पहली रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में जमा कर दी है, लेकिन काले धन की वापसी कैसे होगी, इसपर कोई समयबद्ध योजना भी सामने नहीं आई है.

4. महंगाई से मुक़ाबला

महंगाई के मुद्दे पर यूपीए सरकार को लगातार घेरने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार के पहले सौ दिन में महंगाई में कोई बड़ी कमी देखने को नहीं मिली है.

देश के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश के बावजूद खाद्य मुद्रास्फ़िति दर में हल्का सुधार सरकार के पक्ष में है, लेकिन सब्ज़ियां और खाने-पीने की चीज़ें अभी भी महंगी बनी हुई है.

5. इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में जान फूंकने का वादा

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नरेंद्र मोदी सरकार निर्माण क्षेत्र में सुधार के लिए ‘पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप’ योजनाओं में सुधार चाहती है. लेकिन ये कैसे होगा उसे लेकर रोडमैप स्पष्ट नहीं दिखता.

इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की सरकार की कोशिशों को रिज़र्व बैक के उस नियम से भी नुकसान पहुंचा है, जिसके तहत बैंक इंफ्रास्ट्क्चर बैकों में निवेश नहीं कर सकते.

6. घुसपैठ रोकने की कोशिश

नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले अपने भाषणों में भारत में अवैध तौर पर रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ़ जमकर मोर्चा खोला था और घुसपैठ रोकने का वादा भी किया था.

लेकिन सौ दिन बीत जाने के बाद भी बांग्लादेश के साथ मिलकर इस समस्या का हल निकालने की सार्थक कोशिश नहीं की गई है.

7. भूमि अधिग्रहण क़ानून

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भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी प्रचार में भूमि अधिग्रहण कानून में ‘सुधार’ की मांग पर ज़ोर दिया था. जानकारों का मानना है यूपीए-2 में बना नया क़ानून निर्माण क्षेत्र के विकास में बाधा पहुंचा सकता है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली इस बारे में बात करते रहे हैं, लेकिन क़ानून में बदलाव को लेकर सरकार ने कोई साफ़ संकेत नहीं दिए हैं.

8. राष्ट्रीय शिक्षा नीति

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भारत में शिक्षा की गुणवत्ता, रिसर्च और इनोवेशन की चुनौतियों को दूर करने के लिए नई सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने का वायदा किया था. लेकिन सौ दिनों में इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है.

9. राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज प्रणाली

खेल को लेकर नई सरकार काफ़ी संजीदा दिखी थी और पूरे देश से खेल प्रतिभाओं को ढूंढने के लिए एक प्रणाली बनाने की घोषणा की थी. लेकिन ये भी अब तक कागज़ों में ही दिखती है.

10. जन वितरण प्रणाली में सुधार

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जन वितरण प्रणाली में सुधार पर चुनावी प्रचार में बीजेपी का खासा ज़ोर था. सुधार के लिए पूरे देश में गुजरात मॉडल को लागू किए जाने की चर्चा थी.

हालांकि इस दिशा में बीते सौ दिनों में सरकार का विज़न नहीं दिखा है.

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