बासठ साल बाद साहस का सम्मान

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पुणे के अवकाशप्राप्त कर्नल बी आर करंदीकर के साहस को 62 वर्ष के अंतराल के बाद सराहा गया है. भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल अरूप राहा ने हाल ही में पत्र भेजकर उनका सम्मान किया है. कर्नल करंदीकर अब लगभग 90 वर्ष के हो चुके हैं.

तत्कालीन पायलट भीमराव रघुनाथ करंदीकर ने 28 दिसंबर 1952 के दिन लोहगांव स्थित हवाई अड्डे से ऑस्टर एमके आइएक्स विमान से उड़ान भरी थी.

लेकिन तब उन्हें जरा सा भी अंदेशा नहीं था, कि विमान में एक सांप है और वो भी किंग कोबरा.

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विमान के उड़ान भरने के थोड़ी ही देर बाद सामने के पाइप से एक सांप निकला और काकपिट समेत पूरे विमान में घूमने लगा. उस समय विमान में तीन लोग सवार थे.

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करंदीकर ने धैर्य नहीं खोया और शरीर में ज़्यादा हलचल न करते हुए नासिक के एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सचेत किया और एक घंटा दस मिनट बाद उन्होंने सकुशल विमान नासिक में उतारा.

बाद में इस सांप को मारा गया.

इस घटना की जांच के लिए एक कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी बिठाई गई, लेकिन 1980 में करंदीकर के अवकाश लेने तक रिपोर्ट का कुछ नतीजा नहीं निकला.

प्रधानमंत्री को चिट्ठी

जनवरी 2014 में एक विमान हादसे में दो पायलट्स के मारे जाने की घटना ने करंदीकर को इस मामले को फिर से उठाने के लिए बाध्य किया.

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कर्नल करंदीकर ने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर अपने साहस से अवगत कराया. आठ महीने बाद हाल ही में वायुसेना ने उन्हें सम्मान चिन्ह और प्रशस्ति पत्र दिया.

आठ अगस्त को लिखे इस पत्र में एयर चीफ़ मार्शल राहा कहते हैं, "एक पायलट के तौर पर आपको हुई असुविधा की मैं कल्पना कर सकता हूं और आपके संयम एवं वीरता की मैं सचमुच प्रशंसा करता हूं.”

करंदीकर कहते हैं, "उस समय तो मेरे साहस की सुध किसी ने नहीं ली. लेकिन आज मैं खुश हूँ कि इतने वर्षों बाद मुझे यह मान्यता मिली है.”

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