गोवा में खनन ठेकों का नवीनीकरण

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गोवा सरकार ने लौह अयस्क के 27 खनन मालिकों के ठेकों का नवीनीकरण किया है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी खदान ठेके ख़त्म कर दिए थे.

13 अगस्त को इस बारे में बांबे हाईकोर्ट ने ठेकेदारों की शिकायत पर यह फ़ैसला दिया था. ठेकेदारों की शिकायत थी कि वे नवीनीकरण के लिए स्टांप शुल्क जमा कर चुके हैं.

गोवा की मनोहर परिकर के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पट्टेदारों से कहा था कि वो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर उसके सामने फिर से अपील करें लेकिन अब वो ख़ुद हाईकोर्ट के ताज़ा फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज नहीं करना चाहती है.

गोवा में अवैध खदानों के ख़िलाफ़ मोर्चा संभालने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक रमेश गावस का आरोप है, "सत्तारूढ़ पार्टी की चुप्पी ने खनन माफ़िया और सरकार के बीच गठजोड़ को साफ़ कर दिया है."

राज्य की भाजपा सरकार और केंद्र की कांग्रेस सरकार की ओर से 2012 के सितंबर में लौह अयस्क के खनन पर रोक लगाने से गोवा की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी.

अवैध कारोबार

न्यायमूर्ति एमबी शाह आयोग की रिपोर्ट के संसद में पेश होने के तुरंत बाद खनन पर रोक लगाने का फ़ैसला लिया गया था. आयोग की रिपोर्ट सितंबर 2012 के दूसरे हफ़्ते में संसद में पेश हुई थी.

गोवा फाउंडेशन नामक ग़ैरसरकारी संगठन ने इस पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

17 महीने तक मामले की सुनवाई चली फिर सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2007 के बाद के सभी ठेकों पर प्रतिबंध लगा दिया था.

शाह आयोग ने अनुमान लगाया था कि राज्य में अयस्क के खनन के क्षेत्र में 35,000 करोड़ के अवैध कारोबार हो रहा है.

दूसरी तरफ़ परिकर सरकार ने 370 करोड़ रुपए का स्टांप शुल्क ठेके के नवीनीकरण के नाम पर लिया है.

ठेके पुराने मालिकों को

परिकर ने विधानसभा में हाल में कहा था, "मैं जांच में दखलंदाज़ी नहीं कर सकता. क़ानून अपना काम कर रहा है पर मैं स्टांप शुल्क और रॉयल्टी के रूप में उनसे वसूली कर रहा हूं. मैंने खनन बंद होने के बावजूद उनसे क़रीब 900 करोड़ रुपए अब तक वसूले हैं."

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था, "10 सितंबर 2012 को दिए गोवा सरकार के आदेश और 14 सितंबर 2012 को विदेश मंत्रालय के आदेश तब तक लागू होंगे, जब तक राज्य सरकार की ओर से नए ठेकों की अनुमति और विदेश मंत्रालय की ओर से खनन परियोजनाओं को मंज़ूरी नहीं मिल जाती."

मायने

बांबे हाईकोर्ट ने फ़ैसले की व्याख्या में कहा, ''सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में पैराग्राफ़ 67 में उल्लिखित 'नए ठेके' के मायने हमारी नज़र में इस क़ानून की पुष्टि करता है कि ठेकों का नवीनीकरण नए ठेकों की अनुमति देना भी है."

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हाईकोर्ट के फ़ैसले पर गोवा विधानसभा में पिछले महीने बहस हुई, जिसमें सभी पार्टी विधायकों का मानना था कि ठेके पुराने खदान मालिकों को देने चाहिए.

विपक्ष के नेता के तौर पर परिकर ने खनन घोटाले को सामने लाया था.

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