'ये पाकिस्तान के दोस्त हैं या दुश्मन'

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पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में इमरान ख़ान और ताहिरुल कादरी पर चौतरफ़ा हमले हो रहे हैं.

वजह है पाकिस्तान में जारी संकट के बीच पैदा सुरक्षा चिंताओं के कारण चीनी राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा रद्द होना.

दैनिक इंसाफ़ ने इन दोनों ही नेताओं पर निशाना साधा है. अख़बार के संपादकीय का शीर्षक है, 'ये पाकिस्तान के दोस्त हैं या दुश्मन.'

अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान और ताहिरुल क़ादरी के धरनों और ज़िद ने पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है और पाकिस्तान की साख़ को ठेस पहुंचाई है.

उर्दू अख़बारों की समीक्षा

'वक़्त' लिखता है कि चीनी राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा में दोनों देशों के बीच 32 अरब डॉलर के समझौते होने थे जो अब ठंडे बस्ते में चले गए हैं.

'औसाफ़' ने देश के सुरक्षा हालात के मद्देनजर चीनी राष्ट्रपति का दौरा रद्द होने को अफ़सोसनाक बताया है.

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अख़बार कहता है कि भारत और देश के दुश्मन इस ख़बर पर बगलें बजा रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक़ भारतीय विश्लेषक कह रहे हैं कि जो सरकारी इमारतों की हिफ़ाज़त नहीं कर सकते, वो चीनी राष्ट्रपति की क्या सुरक्षा कर पाएंगे.

अख़बार लिखता है कि अगर इमरान ख़ान और ताहिरुल क़ादरी अपने धरने को इस्लामाबाद से कहीं और ले जाते या चीनी राष्ट्रपति के दौरे से पहले मामले को हल कर लेते तो क्या हर्ज था.

'जंग' ने लिखा कि चीन क्षेत्र में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में पाकिस्तान के हितों का क़ाबिल और भरोसेमंद वकील है, इसलिए वहां के राष्ट्रपति का दौरा रद्द होना, देश, सरकार, विपक्ष और धरना करने वालों, सभी के लिए चिंता का विषय है.

तूफ़ानी बारिश

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'आजकल' में पाकिस्तान की सियासी रस्साकशी पर कार्टून है, जिसमें दो सांडों की लड़ाई को दूर से देख रहा शेर कहता है- 'या तो जल्दी फ़ैसला कर लो या फिर...'

पाकिस्तान में भारी बारिश और बाढ़ से हुई तबाही को भी कई अख़बारों ने अपने संपादकीय का विषय बनाया है.

'नवाए वक़्त' का कहना है कि पंजाब और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में तूफ़ानी बारिश से भारी तबाही हुई है और आवाम को नुक़सान से बचाने में प्रशासन नाकाम रहा है.

अख़बार की टिप्पणी है जो शासक जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते हैं वो शासन करने का हक़ खो देते हैं.

पेशावर से छपने वाले दैनिक 'मशरिक' ने पोलियो के तीन नए मामले सामने आने के बाद अपने संपादकीय में पोलियो से निपटने में पाकिस्तान की नाकामी का मुद्दा उठाया है.

मास्टर की क्लास

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इधर भारत में शिक्षक दिवस पर स्कूली बच्चों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' का संपादकीय है– 'मास्टर मोदी की क्लास.'

अख़बार कहता है कि पहल अच्छी है लेकिन इसने अध्यापक, छात्र और माता पिता तीनों की मुश्किलें बढ़ा दीं और इस पर 125 करोड़ रुपए का जो ख़र्चा हुआ वो अलग.

'हमारा समाज' ने राजस्थान के नए राज्यपाल कल्याण सिंह के शपथग्रहण समारोह में जय श्रीराम के नारे लगने पर चिंता जताई है.

अख़बार कहता है कि इस वक़्त उनकी ज़िम्मेदारियों मुख्यमंत्री से ज़्यादा हैं, इसलिए वो कोशिश करें कि जो शपथग्रहण में हुआ वो फिर न हो.

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