कश्मीर: राहत टीमें भी फंसी, मोबाइल सेवा बाधित

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बाढ़ से प्रभावित भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में संपर्क के सारे साधन ठप हो गए हैं. फ़ोन, मोबाइल सेवाएं और इंटरनेट पर बाढ़ का भारी असर हुआ है.

बाढ़ प्रभावित लोगों से संपर्क ही नहीं हो पा रहा है.

अब तक भारत प्रशासित कश्मीर में लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों बाढ़ में फँसे हुए हैं. पढ़िए स्थानीय पत्रकारों का ब्योरा:

कश्मीर में मुसीबतों का सैलाब

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भारत सरकार के मुताबिक़ अब तक राज्य में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 850 लोगों को निकाला जा चुका है. इसके अलावा प्रभावित क्षेत्र में दस हज़ार कंबल और तीन हज़ार टेंट भी पहुंचाए जाएंगे.

भारतीय वायु सेना के कुल 23 विमान और 26 हेलीकॉप्टर राहत के कामों में लगे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ राहत कार्य के लिए एक हज़ार करोड़ रुपए की सहायता का ऐलान किया.

डीएनए के पत्रकार इफ़्तिख़ार गीलानी ने बीबीसी को बताया, "बाढ़ की वजह से रेडियो कश्मीर, श्रीनगर की सेवाएं भी बंद हो गई हैं. लोगों को बचाने पहुंची राहत टीमें ख़ुद बाढ़ में फंस गई है. ऐसे में लोगों को बचाने के काम में और भी अड़चनें आ गई हैं. सारे संपर्क सूत्र कट चुके हैं."

डल झील में पानी बढ़ा

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गीलानी ने बताया कि लोग मस्जिदों में रात गुज़ार रहे हैं और स्थानीय लोग ही एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं.

श्रीनगर की डल झील में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे आस-पास के लोगों पर ख़तरा बढ़ गया है.

सोपोर से एडवोकेट अल्ताफ़ हुसैन ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया कि फ़िलहाल वहां बारिश बंद है लेकिन वहां झेलम नदी ख़तरे के निशान से काफ़ी ऊपर बह रही है.

अल्ताफ़ हुसैन का कहना था, "झेलम का स्तर बढ़ रहा है जिससे आबादी को ख़तरा है. दक्षिण कश्मीर से पानी बहकर मध्य कश्मीर में आ गया है, श्रीनगर पानी से घिरा हुआ है, हालत बहुत ख़राब है. वो पानी सोमवार दोपहर तक सोपोर में पहुंचने के आसार है जिससे झेलम का स्तर और बढ़ जाएगा और पूरे शहर के डूबने का ख़तरा है."

श्रीनगर से पत्रकार बासित का कहना है कि वहां मकानों की निचली मंज़िल पानी में डूबी है और लोग पहली मंज़िल पर रह रहे हैं.

मोबाइल सेवाएं बाधित

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अपने घर में फंसे बासित ने बताया, "अगर झेलम का स्तर बढ़ा तो पानी दूसरी मंज़िल तक आ जाएगा और हमें छत पर जाना पड़ेगा. पिछले एक-डेढ़ घंटे से पानी का स्तर बढ़ तो रहा है लेकिन धीरे-धीरे. सुबह यहां एक नाव दिखाई दी थी लेकिन वो कहां गई, नहीं पता. मोबाइल फ़ोन में भी कभी कभी सिग्नल आ रहा है."

भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने दावा किया कि सरकार, राहत के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है.

लेकिन गीलानी के मुताबिक़ सबसे बड़ी समस्या है पर्याप्त नौकाओं की कमी.

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दक्षिण कश्मीर में हालात बद से बदतर हो चुके हैं और अब उत्तर कश्मीर में भी बाढ़ धीरे-धीरे पैर पसार रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य में बाढ़ के ख़तरे का जायज़ा लेने के लिए रविवार को हवाई दौरा किया.

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