कोयला आवंटन पर अदालत का फ़ैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिए गए 218 कोयला ब्लॉक आवंटन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई की. इस दौरान चर्चा ये हुई कि आवंटन रद्द करने के फैसले के नतीजे क्या हो सकते हैं.

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वो सभी 218 ब्लॉक के लिए बोली लगाए जाने के पक्ष में है. मगर साथ ही केंद्र ने अनुरोध किया कि जिन 40 खदानों में उत्पादन हो रहा है और छह अन्य जिनमें उत्पादन शुरू होने वाला है उन्हें इस प्रक्रिया से अलग रखा जाए.

केंद्र ने अदालत से अपील की है कि जिन कंपनियों को ये आवंटन किए गए हैं उनका पक्ष जाने बगैर कोयला ब्लॉक आवंटन को रद्द न करें.

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी का कहना था कि अगर कोयला आवंटन रद्द किया जाता है तो सरकार इन ब्लॉकों की नीलामी दोबारा करवाने के लिए तैयार है.

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रोहतगी का ये भी कहना था कि अगर सभी ब्लॉक रद्द कर दिए गए तो सरकारी कोल इंडिया को सक्रिय खदानों का नियंत्रण लेने की अनुमति दी जानी चाहिए या फिर जब तक फिर से नीलामी न हो जाए वही कंपनियाँ वहाँ काम जारी रखें, जिससे आपूर्ति में बाधा न पड़े.

अदालत ने 1993 से 2010 के बीच हुए कोयले के ब्लॉक के आवंटन को अवैध बताया था. अदालत ने कहा था कि कोयला आवंटन में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई और मनमर्जी से उन्हें बाँटा गया था.

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