अमित शाह के ख़िलाफ़ अभी चार्जशीट क्यों?

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के ख़िलाफ़ दाख़िल चार्जशीट वापस होने से अखिलेश यादव सरकार को झटका लगा है.

ये चार्जशीट 13 सितंबर को होने वाले 11 विधानसभा और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव से सिर्फ़ तीन दिन पहले दाख़िल की गई. इसलिए इसके पीछे राजनीतिक मंसूबे के कयास लग रहे थे.

राज्य के प्रमुख सचिव गृह नीरज गुप्ता के मुताबिक़, "यदि राजनीतिक मंसूबा होता तो कोई ग़लती न होती."

गृह विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चार्जशीट बिना उच्च स्तरीय अधिकारियों की जानकारी के दाखिल की गई थी और अब दोबारा दाखिल की जाएगी.

भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक इस पर कुछ कहने को तैयार नहीं.

वैसे विश्लेषकों के अनुसार यदि इसमें राजनीतिक लाभ न होता तो सरकार के वरिष्ठ मंत्री आज़म ख़ान के विरुद्ध भी चार्जशीट दाखिल होनी चाहिए थी. आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ सात अप्रैल 2014 को ग़ाज़ियाबाद में भड़काऊ भाषण के मामले में केस दर्ज कराया गया था.

यूपी की राजनीति

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अमित शाह के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण के मामले में यूपी पुलिस ने चार्जशीट दायर की थी. मगर धारा 173 (2) के तहत पुलिस ने दोषी को गिरफ़्तार नहीं किया.

कोर्ट ने कहा है कि जिन धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया, वो ग़लत है और धारा 188 के तहत आरोप तय करने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति ज़रूरी है, जो पुलिस ने नहीं ली.

चार्जशीट को लेकर लापरवाही का फ़ायदा किसे होगा?

चार्जशीट के पीछे सपा की प्रतिष्ठा का प्रश्न है और आने वाले उपचुनाव में हार की स्थिति से बचने के लिए सपा को मुसलमान मतदाताओं का ही सहारा है.

कई लोगों का मानना है कि ये चार्जशीट इन्हीं मतदाताओं को लुभाने के लिए दायर की गई है.

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