जम्मू-कश्मीरः 'सेना तो आई लेकिन मदद नहीं'

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जम्मू-कश्मीर में आई भारी बाढ़ से अबतक 1,25,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है.

प्रदेश सरकार की तरफ़ से 200 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की गई है.

इसके अनुसार लोगों को अपने घर की मरम्मत के लिए 75,000 रुपए की पहली किश्त दी जाएगी.

वहीं मृतकों के परिजनों को साढ़े तीन लाख रुपए दिए जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट का सुझाव

पीटीआई के मुताबिक़ प्रदेश में बाढ़ के बाद उमर अब्दुल्ला सरकार ने लोगों को खाद्यान संकट से बचाने के लिए एक पैकेज की घोषणा की है.

इसके तहत लोगों को छह महीने तक मुफ़्त राशन मुहैया करवाया जाएगा.

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श्रीनगर और अन्य शहरों में बाढ़ का पानी कम होने के बाद दसियों हज़ार लोगों तक पहुंचने की कोशिशें जारी हैं.

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, "कश्मीर घाटी में भारी बाढ़ के कारण हालात भयावह हो गए हैं. इसके कारण 400 गाँवों के पांच लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. हालात के निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों की जरूरत हैं.''

अदालत ने केंद्र सरकार से राहत कार्य में समन्वय के लिए एकीकृत एजेंसी बनाने पर विचार करने की बात कही.

'सरकार से कोई मदद नहीं'

जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है. लेकिन लोग सरकारी इंतज़ामों से नाराज़ भी हैं.

श्रीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली से एक राहत कैंप का संचालन करने वाले लोगों ने अपनी नाराज़गी जताई.

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उन्होंने कहा, "यह राहत केंद्र हम अपने पैसों से चला रहे हैं. सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिल रही है. पैसा न, पानी न, कुछ न. जो भी इधर चल रहा है पिछले चार दिनों से वो सब अपना है."

एक व्यक्ति ने कहा, "यहां सेना तो आई है, लेकिन उन्होंने हमारी कोई मदद नहीं की. हमारे मकान गिर गए लेकिन कोई बचाने को नहीं आया. हमें स्थानीय लोगों ने सुरक्षित निकाला."

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