कश्मीर में 'बाढ़ अलर्ट का सिस्टम ही नहीं'

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भारत प्रशासित कश्मीर, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और पंजाब प्रांत में हाल में आई बाढ़ में लगभग 450 लोग अब तक मारे जा चुके हैं.

भारतीय प्रधानमंत्री ने कश्मीर दौरे पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों को मदद देने की भी पेशकश कर दी थी.

लेकिन पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया है कि भारत उसके साथ ज़रूरी आंकड़े साझा नहीं करता है.

इस आरोप प्रत्यारोप के बीच एक नई बात सामने आई है कि भारत प्रशासित कश्मीर में तो बाढ़ के बारे में चेतावनी देने की कोई सुविधा ही नहीं है.

बीबीसी नेपाली सेवा के नवीन सिंह खड़का का विश्लेषण

भारत सरकार के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि भारत प्रशासित कश्मीर के लिए बाढ़ का अलर्ट जारी करने की सुविधा नहीं है.

पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि सीमापार बहने वाली नदियों के बारे में भारत सरकार ने कोई आंकड़ा नहीं मुहैया कराया है.

भारत के जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय जल आयोग राज्यों में बाढ़ की पहले से चेतावनी देता है लेकिन हाल ही में कश्मीर में आई बाढ़ के बारे में आयोग पहले से कोई जानकारी नहीं दे सका.

वेबसाइट तक अपडेट नहीं

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आयोग के अध्यक्ष एबी पाण्ड्या ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, ''बाढ़ के बारे में चेतावनी तभी दी जा सकती है जब केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक प्रोटोकॉल पहले से निर्धारित हो.''

पाण्ड्या के अनुसार इसके लिए और बहुत सारे अतिरिक्त काम की ज़रूरत है जो कि नहीं किए जा सके हैं और इसी कारण कश्मीर में बाढ़ के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी जा सकी.

जल आयोग की भारतीय मीडिया में इस कारण काफ़ी आलोचना भी हो रही है कि आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर बाढ़ के ख़तरे वाले राज्यों की सूची में जम्मू-कश्मीर का नाम तक नहीं है.

आयोग से मिलने वाली जानकारी के बाद ही संबंधित राज्य सरकारें अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी करती हैं.

एक ग़ैर-सरकारी संस्था साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स रिवर्स एंड पीपल (एसएएनडीआरपी) के हिमांशु ठक्कर का कहना है, ''ना ही केंद्रीय जल आयोग ने जम्मू-कश्मीर को कोई जानकारी दी थी और न ही राज्य सरकार ने नागरिकों के लिए कोई चेतावनी जारी की थी.''

उनके अनुसार राज्य सरकार की हालत तो ये है कि बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई विभाग की वेबसाइट को 2011 के बाद से अपडेट भी नहीं किया गया है.

भारत-पाकिस्तान सिंधु जल संधि

जल आयोग के एबी पाण्ड्या के अनुसार भारत प्रशासित कश्मीर में बहने वाली नदियों के बारे में कुछ जानकारियां इकट्ठा की गई थीं लेकिन वे सारी 1960 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के लिए थीं.

उस संधि के अनुसार भारत को सिंधु बेसिन में बहने वाली सीमापार नदियों के बारे में आंकड़े पाकिस्तान को मुहैया कराना होता है.

सिंधु बेसिन की नदियां चेनाब, झेलम, सतलज, रावी और व्यास भारत से शुरू होती हैं जबकि सिंधु नदी तिब्बत से शुरू होकर भारत प्रशासित कश्मीर होते हुए पाकिस्तान जाती है.

कश्मीर में आई ताज़ा बाढ़ मुख्य रूप से चेनाब और झेलम नदी के कारण था जिनमें भारत और पाकिस्तान के लगभग 450 लोग मारे गए हैं.

भारत के अनुसार सिंधु जल संधि के तहत इन नदियों के आंकड़े समय रहते पाकिस्तान को मुहैया करा दिए गए थे लेकिन उनसे बाढ़ के बारे में चेतावनी नहीं दी जा सकती है.

उधर पाकिस्तान में अधिकारियों का भी कहना है कि भारत से मिली जानकारी के आधार पर बाढ़ के बारे में चेतावनी नहीं जारी की जा सकती है.

तकनीकी जानकारी की कमी

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पाकिस्तान मौसम विभाग के महानिदेशक हज़रत मीर का कहना है, ''बाढ़ की चेतावनी के लिए हमें तीन चीज़ों की ज़रूरत होती है. पानी की पूर्वानुमानित मात्रा, वास्तविक मात्रा और नदियों में बहने वाला पानी.''

हज़रत मीर के अनुसार, ''नदियों में जब जलस्तर बहुत बढ़ा होता है तब वे जल प्रवाह के बारे में तो जानकारी देते हैं, लेकिन वास्तविक मात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती जो कि बाढ़ के लिए ख़तरे के स्तर को निर्धारित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.''

पाकिस्तान में बाढ़ की चेतावनी देने वाले विभाग के प्रमुख मोहम्मद रियाज़ का कहना है कि भारत से उन्हें उन इलाक़ों के बारे में जानकारी मिलती है जो कि सीमा के बहुत क़रीब हैं और इसलिए पाकिस्तान को सूचना मिलने के बाद भी उसे तैयारी करने के लिए बहुत कम समय मिलता है.

लेकिन एबी पाण्ड्या के अनुसार सिंधु जल संधि के तहत ही पाकिस्तान को बाढ़ चेतावनी प्रणाली विकसित करनी चाहिए.

'मुसीबत नहीं चाहते'

पाण्ड्या का कहना था, ''ये संधि पिछले 50 साल से लागू है. और हम अचानक से इसमें कोई बदलाव करके नई मुसीबत नहीं खड़ी करना चाहते हैं.''

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पाकिस्तान में सरकार की इस बात के लिए काफ़ी आलोचना हो रही है कि पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान में लगभग हर साल बारिश के मौसम के समय भयानक बाढ़ आने के बावजूद पाकिस्तान सरकार वो सब नहीं कर रही है जो वो ख़ुद कर सकती है.

पाकिस्तान सरकार ने जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को घटाकर एक विभाग बना दिया है, मीडिया में इसके लिए भी उसकी काफ़ी किरकिरी हो रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में बाढ़ प्रबंधन की स्थिति पहले ही बहुत ख़राब है और भारत प्रशासित कश्मीर में बाढ़ चेतावनी प्रणाली का ना होना हालात को और बिगाड़ देता है.

हिमांशु ठक्कर ने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की चेतावनी देने को कोई सिस्टम हीं सक्रिय नहीं है तो ऐसे समय में पाकिस्तान को मदद देने की पेशकश कोई मायने नहीं रखती.

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