कश्मीरः एकजुट होकर बनाया हौसलों का पुल

पुलवामा से बडगाम जाने वाली सड़क पर रहमू गांव के पास रोमश नदी पर बना पुल 10 दिन पहले पानी के बहाव की भेंट चढ़ गया.

यहां से आगे नहीं जा सकते लेकिन बाईं तरफ़ थोड़ी दूर हटकर आपको लोगों की भीड़ नज़र आएगी.

काम करते हुए कुछ लोग, पीले रंगों से रंगे 'अर्थ एक्सकेवेटर', डंपर और ट्रैक्टर भी नज़र आएँगे.

पिछले कई दिनों से ये गतिविधि रहमू गांव में जारी है.

यहां के लोगों ने ख़ुद अपने बलबूते पुल बनाने की कोशिश की ताकि गांव का संपर्क फिर से राज्य के दूसरों हिस्सों से हो सके.

'प्रशासन से नाराज'

सरपंच अली मोहम्मद डार कहते हैं कि गांव वालों ने अपने पुल तैयार करने की ठानी है और जो कुछ हो रहा है, वो उनकी मेहनत का नतीजा है.

ग़ुलाम अहमद डार कहते हैं कि अब तक 70 हज़ार रुपये चंदा इकट्ठा किया जा चुका है लेकिन पुल को तैयार करने में दो से ढाई लाख का ख़र्च आएगा.

ग़ुलाम मोहम्मद डार ठेकेदारी का काम करते हैं और इसी गांव में रहते हैं. वे प्रशासन से बहुत नाराज़ लगते हैं.

वे कहते हैं, "हमें 50 पाइप चाहिए थीं. पुल के बीच-बीच में डालने के लिए, जिससे पानी का बहाव न रुके लेकिन प्रशासन ने वो भी नहीं दिया."

उन्होंने बताया कि प्रशासन ने दस पाइप दिए हैं लेकिन वो भी उन्हें अपने किराये पर ढुलवाना पड़ा.

रहमू वासी अभी ढुलाई करने वाले वाहनों और अर्थ एक्सकेवेटर का पैसा भी हर दिन नहीं चुका पा रहे हैं.

मिट्टी और पत्थर

लेकिन डंपर और मशीनों के मालिक मोहम्मद हफ़ीज़ कहते हैं कि ये गांव का मामला है तो उन्हें काम के बाद पैसे मिल ही जाएंगे.

हालांकि गांव वालों को ये पुल पुराने ब्रिज से थोड़ा हटकर बनाना पड़ा है क्योंकि वो जगह बहुत उंची थी और उसे बनाने का ख़र्च वो वहन नहीं कर सकते थे.

साथ ही इस पुल में ज़्यादा काम मिट्टी और पत्थर का है.

इस सवाल पर कि पुल तो सिर्फ़ दो गांवों को जोड़ता दिखता है, सारे गांव वाले विरोध के एक स्वर में कहते हैं, "नहीं नहीं 'ये चार ज़िलों - कुलगाम, शोपियां, अनंतनाग और बडगाम से हमको जोड़ेगा."

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