शी जिनपिंग कितना करीब लाएंगे भारत-चीन को?

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से चीनी लोगों को क्या चाहिए, इसको लेकर वे बेहद स्पष्ट हैं.

लेकिन भारत में चीन को लेकर एक सामूहिक चिंता देखने को मिलती है, जो फ़ैसले और नजरिए दोनों को सीमित करता है.

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान किस तरह के समझौते हो सकते हैं?

क्या उन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच कोई बातचीत होगी, जिसको लेकर तनाव बना रहता है. वे कौन-कौन से पहलू हैं जिनके बहाने दोनों देश एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं?

विश्लेषक सिद्धार्थ वरदराजन का विश्लेषण:

दूसरी अन्य बड़ी ताक़तों की तरह ही, दक्षिण एशिया, एशिया-प्रशांत और विस्तृत एशियाई क्षेत्र में चीन का लक्ष्य अपनी बढ़ती आर्थिक जरूरतों को पूरा करना है. चीन इन इलाकों को बाज़ार और कच्चे उत्पाद के स्रोत और पूंजी निर्यात के ठिकानों के तौर पर देखता है.

इसके चलते चीन का दुनिया के साथ कारोबार, निवेश और वित्तीय लेन देन बढ़ा है.

चीन की मुश्किल

इससे चीन के राजनीतिक नेतृत्व के सामने तीन चुनौतियां भी सामने आई हैं- 1) सीमा पार संपर्क सुनिश्चित करना और समुद्री सीमा की निगरानी करना ताकि विरोधी शक्तियां कारोबार और ऊर्जा के प्रवाह को बाधित नहीं कर सकें.

2) नए बहुपक्षीय व्यवस्था के उभार का मुक़ाबला करने के लिए चीन को तैयार रहना होगा तभी चीन की अपनी आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्वतंत्रता कायम रहेगी

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3) साझेदारी और नए संबंधों का उभार चीन के रणनीतिक स्टैंड को प्रभावित कर सकता है.

ज़ाहिर है, मुख्य प्रतिद्वंदी अमरीका को चीन की इन चुनौतियों का एहसास हो, उससे पहले ही चीन इसके परिणामों के लिए तैयार रहना चाहता है.

चीन का राजनीतिक नेतृत्व जिस तरह से इन चुनौतियों पर प्रतिक्रिया जताता रहा है, उसको लेकर प्राय विरोधाभास देखने को मिलता है. दूसरी ओर भारत का प्रशासन कुछ हद तक अराजक और बिना सोच समझ वाला प्रतीत होता है.

हम ये गलत अनुमान लगाते हैं कि चीन में जो कुछ हो रहा है वह सोच समझ कर रणनीति के मुताबिक किया गया है. रिश्तों में थोड़े से उतार चढ़ाव से हम बड़ा निष्कर्ष निकाल लेते हैं. हालांकि वास्तविकता भिन्न होती है.

राई का पहाड़

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राजनीति और कारोबार से अलग, चीन की विदेश और सामरिक नीतियों में भी खुलापन का अभाव होता है, लिहाजा उसे भी बढ़ा चढ़ा कर पेशा किया जाता रहा है. उदाहरण के लिए, पूर्व राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के कार्यकाल के आखिरी दिनों में, चीन ने जापान, वियतनाम और फ़िलिपींस (भारत के साथ भी कुछ हद तक) के साथ सीमा पर तनाव बढ़े थे.

तब दुनिया भर में उभरते चीन को लेकर चिंता जताई गई थी. इस चिंता ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई एशियाई सुरक्षा कंसेप्ट, जिसमें सेना के इस्तेमाल नहीं करने के बात शामिल है, को भी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं बनने दिया.

इतना ही नहीं इसने, ओबामा प्रशासन के 'एशियाई धुरी' की रणनीति के पक्ष में माहौल तैयार कर दिया.

बहरहाल, शिन जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर छपी रिपोर्टों के मुताबिक, वे भारत में करीब 35 बिलियन डॉलर के निवेश के प्रस्ताव दे सकते हैं.

भारत का फ़ायदा

इसके अलावा चीनी हाई-स्पीड रेल के लिए निवेश के साथ साथ तकनीकी क्षमता देने का प्रस्ताव भी दे सकते हैं जो जापान के बुलेट ट्रेन की तुलना में सस्ता और सहज विकल्प होगा.

चीन के नज़रिए से, भारत के साथ बेहतर राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य रिश्ते बीजिंग सरकार की जरूरत हैं जिसके सहारे वह एशिया और विश्व को लेकर अपनी विस्तृत रणनीति को आगे बढ़ा सकता है.

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भारत चीन के विदेशी निवेश का ठिकाना बन सकता है और हिंद महासागर में सुरक्षा मुहैया करा सकता है. शी जिनपिंग के प्रस्तावित समुद्री सिल्क रूट के विकास और सुरक्षा में भारत अहम भूमिका निभा सकता है.

भारत जिस सम्मान का हकदार है, चीन उसे दे कर एशिया में किसी शीत युद्ध जैसी स्थिति को भी रोक सकता है.

पड़ोसी देशों की मुश्किल

भारत के नजरिए से, शी जिनपिंग को नरेंद्र मोदी को यह भरोसा दिलाना होगा कि भारत-चीन सीमा पर शांति बनी रहेगी. इन सबके लिए भारत को पड़ोसी देशों श्रीलंका, म्यांमार ही नहीं बल्कि नेपाल और बांग्लादेश में भी चीन की उपस्थिति की आलोचना बंद करनी होगी.

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नई दिल्ली सरकार भले इसका सैन्य निहितार्थ निकाल रही हो लेकिन ये छोटे मुल्क तो चीन की मदद से अपने यहां आधारभूत ढांचे का निर्माण करना चाहते हैं, भारत भी तो यही कोशिश कर रहा है.

इनमें से कुछ देशों को ख़ासकर नेपाल के लिए समय आ गया है कि वह ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-चीन संयुक्त उपक्रम लगाए.

समुद्री सिल्क रूट के प्रस्ताव पर भी कुछ भारतीय विश्लेषक बेवजह चिंता जता रहे हैं. समुद्री मार्ग कारोबार और भूगोल से संचालित होते हैं, वो किसी ख़ास देश के लिए अलग नहीं होते.

भूगोल के नजरिए से भारत बेहतर स्थिति में तो है ही. आर्थिक और आधारभूत संरचनाओं के विकास से बाकी मुश्किलें भी दूर हो जाएंगी.

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