नरेंद्र मोदी का 'चीनी सपना'

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चीन ने अपनी समृद्धि से दुनिया को चमत्कृत कर रखा है. ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उसके प्रति आकृष्ट हों, इसमें कोई ताज्जुब नहीं.

सत्ता सम्भालने के महज सौ दिनों के अंदर मोदी सरकार ने जो फ़ैसले लिए, उसमें उनके 'चीनी सपने' की एक झलक दिखती है.

प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात जाकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगवानी करना भी उसी की एक कड़ी है.

विस्तार से पढ़ें रिपोर्ट

मोदी चीन के विकास पर बहुत क़रीबी से नज़र रखते रहे हैं. जब अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों ने मोदी का एक प्रकार से बहिष्कार रखा था तो गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने चीन का चार बार दौरा किया.

इसी साल गुजरात आए चीन के एक प्रतिनिधिमंडल ने चाइना टाउनशिप और औद्योगिक पार्क के लिए तीन जगहें चिह्नित की थीं.

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चीन द्वारा भारत में 100 अरब डॉलर निवेश का सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन संभावना ख़त्म नहीं हुई है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे में औद्योगिक पार्क बनाने समेत कई निवेश मुद्दों पर सहमति बनी है.

केंद्रीय सत्ता की चाह

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चाहे विपक्ष और अपनी पार्टी पर पकड़ बनानी हो, नए न्यायिक आयोग से न्यायपालिका को साधना हो या कैबिनेट मंत्रियों को अनुशासित रखना हो, सत्ता पर पूरी तरह पकड़ बनाने की मंशा मोदी में साफ़ दिखती है.

पंद्रह अगस्त को राष्ट्र को संबोधन में मोदी ने इसे जाहिर भी किया था.

चीन के एकदलीय और केंद्रीयकृत शासन प्रणाली को उसके 'विकास की कहानी' का एक अहम उपकरण माना जाता है. लेकिन क्या भारत में ऐसा संभव है?

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सेंटर फ़ॉर चाइनीज़ स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर अलका आचार्या कहती हैं, ''कुछ लोग मानते हैं कि मोदी की कार्यशैली में एक सर्वसत्तावादी पुट है. क्योंकि वो जानते हैं कि अगले कुछ सालों में यदि आर्थिक विकास की बुनियाद नहीं रखी गई, तो सत्ता में आगे बने रहना मुश्किल होगा.''

रुकावटों का ख़ात्मा

महज सौ दिन में ही मोदी सरकार ने श्रम क़ानूनों में संशोधन, बीमा व रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और योजना आयोग, पर्यावरण एवं वन मंज़ूरी, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुद्दों पर अपनी मंशा साफ़ कर दी है.

चीन इन मामलों में पहले से ही अव्वल रहा है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक शास्त्र के प्रोफ़ेसर रहे मनोरंजन मोहंती कहते हैं, ''चीन में पूंजीपतियों और विदेशी कंपनियों को भारी छूट दी गई है.''

वो कहते हैं, ''चीन के विकास मॉडल से मोदी प्रेरित लगते हैं, लेकिन तीव्र विकास दर के इस मॉडल ने वहां विकराल क्षेत्रीय गैरबराबरी पैदा की है.''

आधारभूत संरचनाएं

चीन की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था सस्ते श्रम के कारण सफ़ल हो पाई.

भारत की स्थिति इससे उलट है. आधारभूत संरचनाओं और सुविधाओं की हालत खस्ता है.

हाल के दिनों में चीन में श्रमिक विवाद, पर्यावरण नुकसान और भ्रष्टाचार जैसे मामले बढ़े हैं.

बेतहाशा विकास ने चीन के सामाजिक तानेबाने पर भारी असर डाला है. नब्बे के दशक में नवउदारवादी नीतियों के कारण भारत भी इनसे अछूता नहीं है.

बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी

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नरेंद्र मोदी ने देश में सौ स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया है और सरकार की प्राथमिकता में बुलेट ट्रेन है.

चीन इन तकनीकी प्रधान लक्ष्यों को पहले ही हासिल कर चुका है.

चीन के साथ व्यापार में भारत का व्यापार घाटा चिंतनीय है.

कहा जा रहा है कि चीनी कंपनियों का निवेश, इस व्यापार घाटे को पाटने में मददगार साबित होगा.

हालांकि इस बात पर बहस बाकी है कि चीन की तरह बड़े पैमाने पर विशालकाय विकास परियोजनाएं लागू करना, 'अंतिम व्यक्ति' को कितना फ़ायदा पहुंचा पाएगा.

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