क़ानून से मिलेगा बुज़ुर्गों को उनका हक़?

वृद्धाश्रम इमेज कॉपीरइट NIRAJ SINHA

कभी वह रेलवे स्टेशन पर भटकती मिली थीं, अब बरसों से वृद्धाश्रम में रह रही हैं. लेकिन इसे वो अपनी तकदीर का हिस्सा मानती हैं. उम्र सौ के पार लेकिन ज़ेहन में अब भी बहुत सी बातें हैं.

झारखंड की राजधानी रांची के एक वृद्ध आश्रम में रहने वाली करुणा देवी की पीड़ा है कि अब ज़माना बदल गया.

झारखंड सरकार ने वृद्ध माता-पिता की देखरेख को अनिवार्य कर दिया है, वरना उनके बच्चों को माता पिता का गुज़ारा भत्ता देना होगा.

इस पर करुणा देवी कहती है, ''मैं बेटे के पास चली जाउंगी, वो क्यों भरेगा पैसा?''

हालांकि बेटे ने लंबे समय से उनकी खोज-ख़बर नहीं ली.

राज्य सरकार ने माता-पिता, वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण नियमावली 2014 को मंजूरी दे दी है.

इसके तहत वृद्ध माता-पिता ने शिकायत की तो सरकार उन्हें अधिकतम दस हज़ार रुपए महीना तक गुज़ारा भत्ता दिलाएगी.

'सख़्ती से होगा लागू'

इमेज कॉपीरइट NIRAJ SINHA

झारखंड की समाज कल्याण मंत्री अन्नपूर्णा देवी कहती हैं, '' वृद्ध माता-पिता को संरक्षण देने की कोशिशें जरूरी हैं. इस नियमावली का सरकार सख़्ती से पालन कराएगी. जल्दी ही ट्राइब्यूनल, राज्य परिषद और जिला स्तर पर कमेटी का गठन होगा.''

वो बताती हैं, ''नियमावली में इसका उल्लेख है कि पक्षकार को जो भी रकम देनी होगी, वो उनके परिवार के सदस्यों की संख्या से विभक्त करते हुए उनकी मासिक आय से अधिक नहीं होगी.''

रांची की एक वृद्ध महिला ऊषा बताने लगीं, ''पति नहीं रहे और बेटा तो शादी के बाद से एकदम बदल गया. बेटी-दामाद बड़े भले हैं, जो यहां आकर देख जाते हैं. वे ही ख़र्चे भी उठाते हैं.''

बेटे से गुज़ारा भत्ता लेने का आवेदन करेंगी, यह पूछने पर वो ख़ामोश हो जाती हैं.

चुनौती

इमेज कॉपीरइट NIRAJ SINHA

समाज कल्याण मंत्री बताती हैं कि प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात घटनाओं में वरिष्ठ नागरिकों को सहायता और राहत पहुंचाना भी ज़रूरी होगा.

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ माजी बताती हैं, ''आए दिन आयोग के सामने शिकायतें आती हैं कि बेटे-बहू, मां-बाप की अनदेखी कर रहे हैं.''

वो कहती हैं, ''जब किसी वृद्ध माता की शिकायत आती है कि बहू, पति पर एकाधिकार समझते हुए उनसे अलग कर रही है, तो अधिक तक़लीफ़ होती है.

वो कहती हैं कि गुज़ारे भत्ते का कदम अच्छा है, ज़रूरत है इसे लागू कराने की.

(बुजुर्गों के नाम बदल दिए गए हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार