'लव जिहाद' पर कमर कसी विद्यार्थी परिषद ने

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लखनऊ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की दो दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला में महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा के दौरान 'लव जिहाद' का मसला पूरी गंभीरता से उठाया गया.

परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अम्बेकर ने लव जिहाद को पाप की संज्ञा देते हुए समाज को इस 'नए संकट' से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा.

अम्बेकर ने इसे अहम मुद्दा बताया और मुस्लिम समुदाय का आह्वान किया कि ऐसे युवकों को रोकें जो जिहाद के नाम पर प्रेम करने का षड्यंत्र करते हैं.

देश के विभिन्न प्रांतों से आई विद्यार्थी परिषद की महिला सदस्यों को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है कि वे लव जिहाद के नाम पर हो रहे फरेब से नवयुवतियों को सचेत करें.

गंभीर समस्या

परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ममता यादव से जब यह कहा गया कि शादी तो हिन्दू पुरुष भी मुस्लिम महिलाओं से करते हैं तो उनका जवाब था, "दक्षिण में ये समस्या इतनी गंभीर है इसका आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते."

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लेकिन 'लव जिहाद' को रोकेंगे कैसे?

इस पर ममता यादव का कहना था, "एक ख़ास उम्र में युवक-युवतियां बहुत जल्दी एक दूसरे से दोस्ती कर लेते हैं. जागरूकता इस बात की होनी चाहिए कि वो लड़की अपनी दोस्ती की बात किसी और को भी बताए. हो सकता है कोई उस लड़के की असलियत जानता हो."

जिस विश्वास से ममता यादव ने ये बात कही उससे लगा कि उन्हें इसकी सफलता में ज़्यादा शक नहीं है. अब विद्यार्थी परिषद के सदस्य शिक्षा संस्थानों में और उनके बाहर ऐसे ही प्रयास करते नज़र आएंगे.

आपत्ति

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Image caption एबीवीपी ने लव जिहाद के मसले पर चिंता जताई है.

सुनील अम्बेकर का आरोप है कि 'लव जिहाद' में लोगों को मरने के बाद जन्नत और हूरों के सपने दिखाए जाते हैं.

इस जागरूकता अभियान के पीछे हिन्दू-मुस्लिम विवाह के विरोध का आभास होता है लेकिन अम्बेकर, ममता यादव, यहां तक राष्ट्रीय सेविका समिति की राष्ट्रीय संयोजक गीता गुंडे भी इस बात से इंकार करते हैं.

तीनो ने अलग- अलग बातचीत में कहा, "हमें अंतर-धार्मिक विवाह से कोई आपत्ति नहीं है आपत्ति है तो प्रेम को जिहाद के लिए इस्तेमाल करने पर."

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