मुठभेड़ पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर पुलिस मुठभेड़ की जांच होनी चाहिए और कथित तौर पर फर्ज़ी मुठभेड़ से जुड़े पुलिस कर्मियों को न तो पदोन्नति दी जाए और न ही वीरता पुरस्कार.

मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पब्लिक यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) की याचिका की सुनवाई के बाद ये दिशा निर्देश जारी किए.

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा निर्देश

-हर पुलिस मुठभेड़ की प्राथमिकी (एफ़आईआर) दर्ज़ करना अनिवार्य होगा.

-हर मुठभेड़ की जांच सीआईडी या अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए.

-पुलिस मुठभेड़ की जांच की प्रगति रिपोर्ट हर छह माह में संबंधित राज्य मानवाधिकार आयोग या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजनी होगी.

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-जांच खत्म होने तक मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों को प्रमोशन या वीरता पुरस्कार नहीं दिया जाएगा.

-आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 176 के तहत हर मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट से जांच अनिवार्य होगी.

-मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच को तेज़ी से पूरा किया जाए और अगर कोई पुलिसकर्मी फ़र्जी मुठभेड़ में शामिल पाया जाए तो उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए.

-पुलिसकर्मियों को अपराधियों के बारे में मिली सूचना को रिकॉर्ड कराना होगा.

-मुठभेड़ के बाद पुलिसकर्मियों को अपने हथियार और गोलियां जमा करनी होंगी.

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