इसरो के मंगलयान का इंजन शुरू हुआ

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर भारत के मंगलयान का तरल इंजन शुरू कर दिया है.

इसरो के अनुसार यान के इंजन का स्टार्ट सफल रहा है और ये ठीक से काम कर रहा है.

मंगल अभियान के इस निर्णायक चरण में पूरे 24 मिनटों तक यान के तरल इंजन को चलाया जाएगा, जो इसे लाल ग्रह की ऑर्बिट यानी कक्षा में स्थापित करेगा.

(पढ़िए: मिशन मंगल पर बीबीसी विशेष)

इसरो को इस बात की सावधानी रखनी होगी कि यान इतना धीमा न हो जाए कि मंगल की सतह से टकरा जाए, या उसकी रफ़्तार इतनी भी तेज़ न हो कि वो मंगल के गुरुत्वाकर्षण से बाहर अंतरिक्ष में खो जाए.

Image caption मंगलयान अगर सफल हुआ तो ये दुनिया का पहला मंगल अभियान होगा जो पहली की कोशिश में सफल हो गई.

मंगलयान क़रीब 300 दिनों की यात्रा के बाद 22 सितंबर को मंगल के गुरुत्वाकर्षण घेरे में प्रवेश कर गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मिशन के इस अहम पड़ाव को करीब से देखने के लिए बंगलौर में स्थित इसरो के मॉनिटरिंग सेंटर में पहुंचे हैं.

अगर यह अभियान पहले प्रयास में ही सफल रहता है तो भारत एशिया ही नहीं दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जिसने एक ही प्रयास में अपना अभियान पूरा कर लिया था.

भारत ने इस मिशन पर करीब 450 करोड़ रुपए खर्च किए है, जो बाकी देशों के अभियानों की तुलना में सबसे ज्यादा क़िफ़ायती है.

मंगल की तस्वीरें और जानकारियां जुटाएगा मंगलयान

अगर सब ठीक रहा तो मंगलयान छह महीनों तक मंगल ग्रह के वातावरण का अध्ययन करेगा.

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ये मीथेन गैस का पता लगाएगा, साथ ही रहस्य बने हुए ब्रह्मांड के उस सवाल का भी पता लगाएगा कि क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं?

ये भी अनुमान है कि कक्षा में स्थापित होने के कुछ ही घंटों में यान एक भारतीय आंख द्वारा मंगल ग्रह की ली गई तस्वीरें भेजना शुरू कर देगा.

इससे मंगल का पानी कैसे ख़त्म हो गया जैसे सभी महत्वपूर्ण सवालों को समझने में मदद मिलेगी, जो पृथ्वी पर इंसानों के लंबे समय तक अस्तित्व बने रहने के लिए ज़रूरी हैं.

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