मुंबई की मोनो रेल एक 'महंगा खिलौना' है!

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ऐसा लगता है देश की पहली मोनो रेल सेवा मुंबई के यात्रियों को रास नहीं आई है.

शुरू में यह सेवा सुबह छह बजे से शाम के छह बजे तक चलाई जाती थी.

इसे बाद में रात 10 बजे तक बढ़ा दिया गया. लेकिन यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हुई.

अब आलम यह है कि मुंबई मोनो रेल सफ़ेद हाथी बनकर रह गई है जिसका परिचालन का ख़र्च इससे होने वाली आमदनी से कई गुना ज़्यादा है.

पढ़िए अश्विन अघोर की रिपोर्ट

मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित तथा परिचालित मुंबई मोनो रेल से वडाला डिपो और चेंबूर के बीच एक दिन में औसतन 12 हज़ार यात्री सफ़र करते हैं.

राजस्व

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सुबह छह बजे से लेकर रात के 10 बजे तक वडाला-चेंबूर और चेंबू-वडाला के बीच हर 15 मिनट में एक गाड़ी चलती है.

मुसाफ़िरों से मिलने वाला राजस्व फ़िलहाल हर रोज़ एक लाख रुपये के क़रीब औसतन बैठता है.

मुंबई के परिवहन विशेषज्ञ सुधीर बादामी ने बीबीसी से कहा, "यह बहुत ही ख़राब स्थिति है. मेरे हिसाब से मोनो रेल एक महंगा खिलौना है."

आकर्षण

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बादामी का कहना है, "फ़िलहाल वडाला और चेंबूर के बीच आठ किलोमीटर के सफ़र में मोनो रेल किसी भी ऐसे जगह से नहीं गुज़रती जहां अधिक लोग हो. और बहुत सारे लोग इसका लाभ उठाते हों."

"जब इस परियोजना का दूसरा चरण- वडाला से जेकब सर्कल- पूरा हो जाएगा, तब हो सकता है, लोग इसे इस्तेमाल करने लगे."

शुरू के दिनों में मोनो रेल के प्रति आकर्षण के चलते कई लोग मुंबई के अलग-अलग इलाक़ों से ख़ास तौर पर इसमें सफ़र करने आते थे.

लेकिन अब यह सिलसिला भी बंद हो गया है. मुलुंड में रहने वाले इन्वेस्टमेंट कंसल्टंट सुनील जोशी भी उनमें से एक थे.

दूसरा चरण

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वो कहते हैं, "शुरुआत के दिनों में मोनो रेल एक आकर्षण का विषय था. कई लोगों की तरह मैं भी अपने परिवार के साथ इसमें सफ़र करने गया था. लेकिन मुझे मोनो रेल और एसी बस में कोई अंतर नहीं लगा."

मुंबई मोनो रेल का वडाला और जेकब सर्कल तक का दूसरा चरण अभी निर्माणाधीन है.

वडाला और करी रोड के पास मोनो रेल मध्य रेलवे की लाइनों के ऊपर से गुज़रती है. जिसके लिए रेलवे से सुरक्षा अनुमति ज़रूरी है.

सुरक्षा का मामला

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Image caption मुंबई मोनोरेल की ओर यात्रियों का रुझान उम्मीद से कम देखा गया है.

मध्य रेलवे के सुरक्षा आयुक्त चेतन बक्शी के अनुसार करी रोड इलाके में मोनो रेल के खंभे की ऊंचाई काफ़ी कम है जो सुरक्षा का गंभीर मामला हो सकता है.

इसकी वजह से एमएमआरडीए को इन खंभों की ऊंचाई बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.

एमएमआरडीए के जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने नाम ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, "मध्य रेलवे की तरफ से इस बारे में पत्राचार हुआ है. जब तक उनकी सारी शर्तों का पालन नहीं होगा, हमें मोनो रेल का दूसरा चरण शुरू करने की अनुमती नहीं मिल सकती."

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