'लाहौर घोषणापत्र की विफलता नहीं था कारगिल'

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नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री की हैसियत से अमरीका की यात्रा पर हैं. इस यात्रा को लेकर भारत ही नहीं अमरीकी मीडिया में भी ज़ोरदार हलचल है.

नरेंद्र मोदी ने 1999 में भी अमरीका गए थे और तब उन्होंने बतौर भाजपा महासचिव टेलीविज़न पर इंटरव्यू दिया था.

टीवी एशिया के कार्यक्रम 'फ़ेस टू फ़ेस' में उन्होंने 1999 के आम चुनावों से लेकर कारगिल घटना और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर बात की थी.

टीवी एशिया की पत्रकार दृष्टि देसाई के नरेंद्र मोदी से कुछ अहम सवाल और उनके जवाब

कारगिल क्यों हुआ?

कारगिल घटना लाहौर घोषणापत्र की विफलता नहीं थी. कारगिल इसलिए हुआ क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने कश्मीर घाटी में जो नीतियां लागू की.

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उस सफलता के चलते कारगिल हुआ. पिछले 10-12 साल से घाटी पर आतंकवादियों का कब्जा था.

अटल सरकार के आने के बाद ईंट का जवाब पत्थर से देने की योजना बनी. एक हज़ार से अधिक आतंकवादियों को मारा गया.

इससे लोगों का विश्वास लौटा और यह वजह रही कि देशी-विदेशी पर्यटक कश्मीर गए.

ये सब देखकर आंतकवादी बौखला गए. यही वजह रही है कि उन्हें कश्मीर घाटी छोड़नी पड़ी और उन्होंने लद्दाख के कारगिल में कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा किया.

सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर?

भाजपा सोनिया गांधी का विरोध नहीं करती और न ही उन पर कोई आरोप लगाती है.

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इसलिए चर्चा सोनिया गांधी पर नहीं, बल्कि शीर्ष पदों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश आदि पर कोई विदेशी मूल का व्यक्ति होना चाहिए कि नहीं.

जब संविधान निर्माताओं ने संविधान बनाया.

तब उन्होंने सोचा ही नहीं होगा कि महात्मा गांधी की जो कांग्रेस, 'विदेशी चले जाओ' के नारे लगा रही थी, वही कांग्रेस 'विदेशी लाओ का मंत्र पढ़ेगी'.

पंडित जवाहरलाल नेहरू के जमाने की घटना थी. होल्कर रियासत के राजा की दो पत्नियां थी. एक विदेशी और एक भारतीय.

होल्कर चाहते थे कि उनकी विरासत विदेशी पत्नी से पैदा हुआ बेटा संभाले, लेकिन नेहरू सरकार ने लिखित में फ़ैसला दिया कि होल्कर परिवार का वारिस हिंदुस्तानी महिला की कोख से पैदा हुआ पुत्र होगा.

गठबंधन सरकारें कब तक?

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जिस तरह की राजनीति अभी चल रही है, मुझे लगता है कि लंबे समय तक गठबंधन युग रहेगा.

हिंदुस्तान का भला भी इसी में है कि क्षेत्रीय पार्टियों को सम्मान के साथ राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाना चाहिए.

हिंदू नेशनलिस्ट पार्टी का तमगा पसंद है?

हमें पसंद हो न हो, मीडिया का अपना मिजाज है.

हम इस तरह के विवादों में नहीं पड़ते.

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हमारा ट्रैक रिकॉर्ड तय करेगा कि हम कौन हैं, क्या हैं, कहां जाना चाहते हैं.

धर्म का राजनीति से क्या संबंध होना चाहिए?

अधर्म की राजनीति नहीं होनी चाहिए. राजनीति धर्म की ही होनी चाहिए.

धर्म राजनीति के लिए क्या कर सकता है, ये तो नहीं पता.

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धर्म का मतलब अगर आप रिलिज़न कहते हैं, तो मैं उससे सहमत नहीं हूं.

धर्म हमारे लिए कर्तव्य है पितृधर्म, मातृधर्म, राजधर्म. रिलीज़न उपासना से जुड़ा है, धर्म उपासना से जुड़ा हुआ नहीं है.

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