मुंबई में ख़ुदकुशी करने का नया पता!

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मुंबई का सी लिंक. कई लोग इसे इंजीनियरिंग का करिश्मा मानते हैं तो कई इसे रोज़मर्रा की सहूलियत समझते हैं.

और कई इसे मुंबई का सबसे रोमांटिक हिस्सा कहते हैं. अरब महासागर पर समुद्र से 213 फीट की ऊँचाई पर जाती ये सड़क मुंबई के दो छोरों को जोड़ती है.

ये शहर के ट्रैफिक को हल्का करती है. पांच किलोमीटर के बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर चौबीसों घंटे गाड़ियाँ सफ़र करती हैं.

मुंबई की लाइफ़लाइन बनते जा रहे बांद्रा-वर्ली सी लिंक को अब लाइफ़ टेकर– यानी 'जीवन लेने वाले' का भी नाम मिलता नज़र आ रहा है.

साल 2009 में बने इस सी लिंक पर अब तक आत्महत्या के नौ केस सामने आ गए हैं. पिछले तीन हफ्तों में तो यहाँ से चार लोगों ने आत्महत्या की है.

तो क्या मुंबई को सी लिंक के रूप में एक नया सुसाइड प्वॉइंट मिल गया है?

पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट

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सी लिंक के पांच किलोमीटर के इस पुल पर फ़िलहाल छह कैमरे लगे हुए हैं.

अक्तूबर 2014 के अंत तक इन कैमरों की संख्या को 6 से 80 कर दिया जाएगा. वजह है, सुरक्षा. इन कैमेरों की रिकॉर्डिंग पुलिस को दी जाएगी.

वर्ली पुलिस थाने के वरिष्ठ इंस्पेक्टर सुनील जैन का तो कहना है, "हाँ बिलकुल! ये तो बन ही गई है आत्महत्या करने की नई जगह. हमने तो कई बार सी-लिंक बनाने वाली संस्था महाराष्ट्र स्टेट रोड बोर्ड को कहा है कि इसके बारे में कुछ करें."

जैन के मुताबिक़, "लेकिन उनका हर बार यही कहना है कि हमने सी-लिंक ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बनाया है. हम इससे खुदकुशी करने वाले लोगों की कैसे जिम्मेवारी लें."

जिम्मेवारी किसकी?

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असल में सी-लिंक की जिम्मेवारी से हर कोई हाथ साफ़ करना चाहता है. बांद्रा-वर्ली सी लिंक की सुरक्षा दो पुलिस स्टेशनों के बीच बँटी हुई है.

116 खम्भे वाले इस पुल पर नंबर एक से 19वें खम्भे तक का इलाका बांद्रा पुलिस के पास और 19वें खम्भे से बाकी खम्भों तक का हिस्सा वर्ली पुलिस के पास है.

अब इस पर से कूदने वाले की जिम्मेवारी किसकी? इस बात से पुलिस और पुल बनाने वाली संस्था एमएसआरडीसी, दोनों ही अपना पल्ला झाड़ना चाहती हैं.

एमएसआरडीसी के चीफ़ इंजीनियर देवधर का कहना है, "हम किसी को आत्महत्या करने से कैसे रोकें? ऐसे पुलों पर न केवल भारत में बल्कि विश्व भर में लोग जान देना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि वे ऐसी हरकत से मशहूर हो जाएंगे."

मंशा?

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देवधर कहते हैं, "हमने तो इस सी-लिंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया है, जिसका काम है मुंबई में बेहतर ट्रैफिक मूवमेंट. कोई इंसान यहाँ आकर अगर खुदकुशी करना चाहे तो हम उसकी मंशा को कैसे जानें."

उनके अनुसार, "हम चाहते हैं कि पुलिस पुल पर चौकसी बढ़ाए और जो भी गाड़ी सी-लिंक पर आकर रुकती है, उसे दंडित करे."

लेकिन कैमरे से क्या होगा? बांद्रा स्थित पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर रामचंदर दव्ले का कहना है, "सी लिंक पर सीसीटीवी बढ़ाए जाने की मांग पर एक हाई लेवल की मीटिंग हुई है. लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं हो पाएगा."

सीसीटीवी

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उनका कहना था, "जितनी देर में हम सीसीटीवी पर उस इंसान को गाड़ी से उतरता देखेंगे, उतने में वो कूद जाएगा. सीसीटीवी सिर्फ सुरक्षा कारणों से लगाए जा रहे हैं. आत्महत्या करने वाला कभी आर्थिक, कभी सामाजिक कारणों से ऐसा कदम उठाता है. उसमें हम क्या कर सकते हैं?"

मुंबई में 400 लोगों के लिए एक पुलिस वाला है. सी लिंक के अलावा रोज़ रेलवे ट्रैक या और कई तरीकों से यहाँ लोग अपनी जान देते हैं.

लेकिन सी लिंक से कूदने वाले लोगों के केस को पुलिस आत्महत्या नहीं बल्कि एक्सीडेंट का नाम देती है.

इंसानियत

Image caption सी-लिंक के अलावा रोज़ रेलवे ट्रैक या और कई तरीको से यहाँ लोग अपनी जान देते हैं.

आखिर क्यों नौ सुसाइड केस में से आठ को एक्सीडेंट करार किया गया?

वर्ली पुलिस थाने के सुनील जैन कहते हैं, "इंसानियत भी कोई चीज़ है. अगर हम आत्महत्या घोषित कर देंगे तो मरने वाले के घर वालों को जो कुछ इधर-उधर से मिलना होगा वो भी नहीं हो पाएगा. मरने वाले के परिवार पर क्या बीतती है, हम जानते हैं."

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