पाक मीडिया: कटघरे में अमरीका

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पाकिस्तान की उर्दू मीडिया में अमरीका की नीतियों और भारत से उसके बढ़ते सहयोग पर सवाल उठाए गए हैं.

नवाए वक़्त ने अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की उस पेशकश पर आपत्ति की हैं जिसमें 34 तरह के बेहद आधुनिक हथियार तैयार करने में भारत को साझेदार बनाने की बात कही गई है.

अख़बार लिखता है कि अमरीका 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ युद्ध में फ्रंटलाइन सहयोगी तो पाकिस्तान को बनाता है लेकिन मेहरबानियां भारत पर करता है.

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान के शासकों को ये ज़रूर सोचना चाहिए कि वो तो अमरीका की सुरक्षा की ख़ातिर 'आंतकवाद' के ख़िलाफ़ जंग में अपने अंजर पंजर तक हिला चुके हैं लेकिन अमरीका हमारी सुरक्षा का ख़्याल रखे बिना भारत को रक्षा क्षमताओं से मालामाल कर रहा है.

'अमरीका कन्फ़्यूज़'

वहीं जंग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमरीकी राष्ट्रपति के भाषण पर संपादकीय लिखा है - अमरीका मुस्लिम जगत को लेकर कन्फ़्यूज़ क्यों है.

अख़बार ने राष्ट्रपति ओबामा के इस बयान का ज़िक्र किया है कि उनकी जंग इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन मुसलमानों को ख़ुद को बदलना होगा.

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अख़बार के मुताबिक़ हिंसा, चरमपंथ और सांप्रदायिकता किसी भी समाज के लिए नुक़सानदेह हैं लेकिन इस तरह की सोच को मुस्लिम दुनिया में भी ज़्यादातर लोग नापसंद करते हैं.

दैनिक पाकिस्तान ने एशियाई खेलों में पाकिस्तानी हॉकी टीम की भारत पर जीत को संपादकीय का विषय बनाया है.

अख़बार कहता है कि छोटी छोटी ख़ुशियों को तरसने वाले पाकिस्तान के लोगों ने जब सुना कि भारत को 2-1 से हराकर पाकिस्तान सेमी फ़ाइनल में दाख़िल हो गया है तो पूरा देश ख़ुशी से फूल कर कुप्पा हो गया.

दैनिक एक्सप्रेस ने भारत के मंगलयान की कामयाबी की तारीफ़ की है और पाकिस्तानी शासकों से इस बात पर ग़ौर करने को भी कहा है कि अगर भारत ऐसा कर सकता है तो पाकिस्तान क्यों नहीं.

अख़बार ने परमाणु हथियार तैयार करने की पाकिस्तान की उपलब्धि का ज़िक्र किया है.

'अभिनंदन हो'

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रुख़ भारत का करें तो मंगलयान पर हमारा समाज लिखता है कि जब खिलाड़ी मेडल या कप लेकर आते हैं तो हवाई अड्डों पर उनके स्वागत के लिए जनता उमड़ पड़ती है, जगह जगह जुलूस निकाले जाते हैं, लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद अंतरिक्ष विज्ञानियों के लिए कहीं कोई ख़ास कार्यक्रम नहीं हुआ.

अख़बार कहता है कि भारत को ऐतिहासिक कामयाबी दिलाने वाले वैज्ञानिकों को हर स्तर पर उनका अभिनंदन करना चाहिए.

हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने अमरीकी दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ समन जारी होने का मुद्दा अपने संपादकीय में उठाया है.

अख़बार कहता है कि अमरीका में मोदी के ख़िलाफ़ दायर याचिका से न तो दंगा पीड़ितों को इंसाफ़ मिल सकेगा और न ही मोदी की सेहत पर इससे कोई फ़र्क़ पड़ेगा, लेकिन ये सवाल ज़रूर पैदा होता है जब मोदी को सरकार का प्रमुख होने के नाते क़ानूनी कार्रवाई से छूट हासिल है तो ये समन जारी ही क्यों किया गया.

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