हरियाणा में क्या हाल है 'आप' का?

आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव इमेज कॉपीरइट DALJEET AMI

हरियाणा में पिछले साल अपने राजनीतिक अभियान की जोर शोर से शुरुआत करने वाली आम आदमी पार्टी लोकसभा की विफलता के बाद विधानसभा का चुनाव तक नहीं लड़ रही है.

जब सभी पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं तो आम आदमी पार्टी अपनी साख कायम रखने के लिए संघर्ष कर रही है.

राज्य इकाई चुनाव लड़ना चाहती थी लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने पूरा ध्यान दिल्ली पर रखने की दलील दी है. लेकिन 'आप' के हरियाणा में चुनाव न लड़ने के फ़ैसले से कार्यकर्ता ख़ुश नहीं हैं.

'आप की आवाज़'

अब हरियाणा में आप की चुनौती कार्यकर्ताओं को पार्टी के साथ जोड़ कर रखने की है.

जब बाक़ी पार्टियों के नेता टिकट की उम्मीद में एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आसानी से आ-जा रहे हैं तो लोकसभा चुनाव में तकरीबन सवा चार फीसदी वोट पाने वाली आम आदमी पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं पर दूसरी पार्टियों के दवाब की चिंता सता रही है.

इमेज कॉपीरइट PTI

14 विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी को 10 हज़ार से ज़्यादा वोट पड़े थे और 24 निर्वाचन क्षेत्रों में सात से 10 हज़ार के बीच में वोट पड़े थे.

हरियाणा में आम आदमी पार्टी ने चुनाव के दौरान 'आप की आवाज़' नाम से मुहिम चलाने का फैसला किया है.

मुद्दों पर सक्रियता

इमेज कॉपीरइट DALJEET AMI

इसके बारे में पार्टी की हरियाणा इकाई के प्रवक्ता राजीव गोदारा बताते हैं, "इस मुहिम में तीन मुद्दे है - चेतना, चोट और चौकीदारी. इसमें महत्वपूर्ण सामाजिक सवालों को उठाया जाएगा. दाग़ी उम्मीदवारों पर चोट की जाएगी और आचार संहिता वाले मुद्दों को उठाया जाएगा."

पंचकुला से आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता शालिनी मालवीय का कहती हैं, "आम आदमी पार्टी का काम चुनाव लड़ना मात्र नहीं है. मौजूदा राजनैतिक खेल में हमारी पार्टी इस वक्त चुनाव लड़ने की हालत में नहीं है. हम लोगों के मुद्दों को लेकर सक्रियता बनाए हुए हैं."

'आप' की हार

इमेज कॉपीरइट AFP GETTY
Image caption लोकसभा चुनावों में हरियाणा में 'आप' को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली.

पंचकुला से ही पार्टी के कार्यकर्ता आशीष का कहना है, "चुनाव ना लड़ने के फैसले से कार्यकर्ता निराश हैं और इसको पार्टी का कदम पीछे खींचना माना जा सकता है."

भाजपा की चंडीगढ़ इकाई के प्रवक्ता डॉ. धीरेंदर तायल का कहना है, "यह आप की अंतर्कलह और महत्वकांक्षा से निकला फैसला है. दूसरा कारण लोकसभा में हुई आम आदमी पार्टी की हार है, जिसने उनको असलियत से अवगत करवाया है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार