निर्यात होने वाला 'बीफ़' भैंस का मांस है

भैंस

भारत से होने वाले 'बीफ' के निर्यात को लेकर काफी हंगामा रहा है और मांग उठती रही है कि इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए. लेकिन भारत से निर्यात होने वाला बीफ़ दरअसल भैंस का मांस है, गोमांस नहीं.

समझा जाता रहा है कि भारत से सबसे ज़्यादा 'बीफ' का निर्यात सऊदी अरब या अन्य खाड़ी देशों को होता है. लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि भारत से बीफ का सबसे ज़्यादा निर्यात वियतनाम और थाईलैंड को होता है.

बीफ़ है भैंस का मांस

बीफ़ निर्यात करने वाली कंपनी 'मिरहा एक्सपोर्ट्स' के प्रबंध निदेशक शुआब अहमद के अनुसार यह कहना ग़लत है कि भारत से निर्यात होने वाला 'बीफ' गोमांस है.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

वो कहते हैं, "यह पूरी तरह से भैंस का मांस है, जिसका उत्पादन और निर्यात सरकार की देखरेख में ही होता है. हो सकता है कि कुछ निर्यातक ग़ैर क़ानूनी तरीके से गोमांस भी मिलाकर भेज रहे हों. लेकिन सबको एक ही लाठी से नहीं हांका जा सकता है."

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों के अनुसार भारत में भैंसों की संख्या 8.8 करोड़ है जो विश्व में भैंसों की कुल आबादी का 58 प्रतिशत है.

और भारत में कुल मिलाकर 24 बूचड़खाने हैं. इनमें से 12 बूचड़खाने केवल निर्यात के लिए हैं.

इसके उत्पादन के मुख्य केंद्र पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य हैं.

कहीं पर अपराध कहीं पर नहीं

इमेज कॉपीरइट c
Image caption भारत से जो बीफ़ निर्यात होता है, वह का गाय का नहीं भैंस का मांस है.

वैसे तो गोहत्या भारत में अपराध है लेकिन ये राज्य सरकारों पर निर्भर करता है कि वो गोहत्या संबंधित क़ानून अपने स्तर पर बनाएं.

कुछ इतिहासकारों के मुताबिक प्राचीन भारत में गाय और बैल की बलि का चलन था. लेकिन ये बेहद विवादास्पद विषय है जिसपर बहस जारी है.

भारत में मुसलामानों के अलावा ईसाइयों और कुछ अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के बीच भी गोमांस खाने का चलन रहा है.

फतवा

लेकिन दक्षिण भारत में 'बीफ फेस्टिवल' आयोजित करने वाले दलित, आदिवासी, बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन के मोहन धरावत का कहना है कि लोगों को अपना खाना चुनने की आज़ादी होनी चाहिए.

हालांकि गोमांस के सेवन को लेकर भारत में बड़े इस्लामिक इदारों दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी कर मुसलामानों से हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करने की अपील भी की है.

इस बारे में संस्था ने फ़तवा भी जारी किया है और कहा है कि क़ानून के खिलाफ गाय को काटना ग़ैर इस्लामिक है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार