जयललिता को नहीं मिली ज़मानत

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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता ज़मानत नहीं दी है.

मंगलवार को अदालत ने जमानत पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला ऐसा नहीं है जिसमें सज़ा को निलंबित किया जा सके.

इससे पहले अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा था कि उन्हें जयललिता को सशर्त ज़मानत से कोई आपत्ति नहीं है.

ये ख़बर सामने आते ही मीडिया में ख़बर चलने लगी कि जयललिता को ज़मानत दे दी गई है मगर जब अंतिम फ़ैसला सामने आया तो पता चला कि कोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार कर दिया.

जयललिता के वकील राम जेठमलानी ने चारा घोटाले के मामले में लालू प्रसाद को मिली जमानत का उल्लेख करते हुए जयललिता को जमानत देने की अपील की थी लेकिन कोर्ट ने इस आधार को नहीं माना.

हाई कोर्ट का ज़मानत से इनकार

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Image caption कर्नाटक उच्च न्यायालय में जस्टिस ए वी चंद्रशेखर ने जमानत याचिका पर सुनवाई की.

जस्टिस ए वी चंद्रशेखर का कहना था कि दोनों मामले की समानता नहीं हो सकती क्योंकि जब सुप्रीम कोर्ट ने लालू को ज़मानत दी थी तो वो दस महीने से ज़मानत पर ही थे.

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जो सज़ा सुनाई गई है उसे निलंबित नहीं किया जा सकता है और न ही ऐसा करने के लिए पर्याप्त ज़मीन है.

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार से मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है.

आय से अधिक संपत्ति के 18 साल पुराने मामले में जयललिता को चार साल के कारावास की सजा सुनाई गई है और वह 27 सितंबर से जेल में बंद हैं.

पल-पल बदलता रहा माहौल

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चेन्नई से स्थानीय पत्रकार पीएम तिवारी ने बीबीसी को बताया कि वहां माहौल सुबह से ही बेहद तनावपूर्ण था. अम्मा यानी जयललिता के समर्थक सुबह से ही महानगर चेन्नई समेत राज्य के तमाम शहरों में शिविर लगा कर बैठे थे.

सबकी जुबान पपर बस एक ही सवाल कि आज अदालत क्या फ़ैसला सुनाएगी? दोपहर बाद जब यह खबर आई कि अभियोजन पक्ष को अम्मा की सशर्त जमानत पर कोई एतराज नहीं है तो माहौल बदलने लगा.

पिछले दस दिनों में पहली बार तनाव भरे चेहरों पर हंसी झलकने लगी. वह नाचने और पटाखे फोड़ने लगे.

लेकिन कुछ देर बाद अदालती फैसला सुनते ही माहौल पल भर में पूरी तरह बदल गया और लोग छाती पीट कर रोने लगे.

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एक समर्थक जी. राजू कहते हैं, "अम्मा हमारे लिए भगवान हैं. उनके ख़िलाफ़ साजिश की गई है."

एक अन्य कार्यकर्ता बासुदेवन का कहना था, "पार्टी के लाखों समर्थक अम्मा के लिए जान देने को तैयार हैं."

अदालती फ़ैसले से राज्य के आम लोगों और व्यापार जगत भी सकते में है. अम्मा के जेल जाने के बाद कभी बंद तो कभी प्रदर्शन के मारे आम लोग आजिज आ गए हैं. अब इसके और तेज. होने का अंदेशा है.

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