लड़कियों की शादी 18 के बजाए 21 में हो?

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मद्रास हाई कोर्ट ने लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु को बढ़ाने का विचार सुझाया है.

घर से ग़ायब हुई एक लड़की के संबंध में दायर की गई हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका) पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने ये सुझाव दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जस्टिस एस मणिकुमार और वीएस रवि की खंड पीठ ने कहा, "लड़कों के लिए शादी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है जबकि लड़कियों के लिए 18 है. 17 साल की उम्र तक दोनों एक जैसे ही वातावरण में बड़े होते हैं तो फिर लड़कियों को 18 वर्ष की उम्र में लड़कों के मुक़ाबले अधिक परिपक्व कैसे माना जा सकता है?"

अदालत ने इंडियन मेजोरिटी एक्ट 1875 और बाल विवाह निषेध अधिनियम में संशोधनों के सुझाव भी दिए.

अदालत ने इस बात पर हैरानी ज़ाहिर की कि क्या लड़कियाँ 18 वर्ष की उम्र में शादी के लिए सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिपक्वता हासिल कर लेती हैं.

हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक लड़कों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है.

आकर्षण के कारण शादी

जजों ने कहा कि हाई कोर्ट में लड़कियों के 18 वर्ष की उम्र में प्रेमियों के साथ भागने के संबंध में दायर की जाने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है.

Image caption अदालत ने सवाल किया कि लड़कों और लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र में फ़र्क़ क्यों हैं?

बुधवार को आर थियागराजन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि कोई भी अभिभावक ये नहीं चाहेंगे कि उनकी बेटी घर से भागकर उनकी अनुपस्थिति में अपनी मर्ज़ी से शादी करे.

अदालत ने कहा है कि परिजन अपने बच्चों को लाड़-प्यार से पालते-पोसते हैं, उम्मीदों से उन्हें पढ़ाते हैं और फिर बहुत सोच समझकर और तथ्यों की जाँच-परख करके ये तय करते हैं कि उनके बच्चों से शादी कौन करेगा.

अदालत ने कहा, "परिजनों की पीड़ा यह है कि कमसिन उम्र में, जब बच्चे मानसिक और मनोवैज्ञानिक तौर पर परिपक्व नहीं होते हैं, अपने जीवन के बारे में फ़ैसला लेकर आकर्षण के कारण शादी कर लेते हैं."

मानसिक परिपक्वता

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अदालत ने कहा कि इन्हीं कारणों से बचने के लिए लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु को 21 वर्ष करने या 18 वर्ष से बढ़ाने पर विचार करने की ज़रूतर है.

अदालत ने कहा, "18 वर्ष की उम्र में लड़कियाँ स्कूटर चला सकती हैं या नौकरी पा सकी हैं लेकिन इसकी तुलना शादी के लिए ज़रूरी मानसिक परिपक्वता से नहीं की जा सकती है."

अदालत ने कहा यह भी कहा कि परिजन हर समय अपनी बेटियों पर नज़र नहीं रख सकते हैं. मीडिया का लड़कियों पर नकारात्मक प्रभाव हो रहा है. 18 साल की ज़्यादातर लड़कियाँ अपनी मर्ज़ी से शादी करने की बात कहती है लेकिन परिजन नहीं चाहेंगे की उनकी बेटियाँ ऐसे शादी करें.

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