मोदी ने दी सत्यार्थी और मलाला को बधाई

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बचपन बचाओ आंदोलन के ज़रिए हज़ारों बच्चों का जीवन बचाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को नोबेल का शांति पुरस्कार मिलने से पहले बहुत ज़्यादा लोग नहीं जानते थे.

यही वजह है कि शुक्रवार दोपहर जैसे ही शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए पाकिस्तान की सत्रह वर्षीय छात्रा मलाला युसुफ़ज़ई के साथ भारत के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी का नाम आया, लोगों की दिलचस्पी उनके बारे में अचानक बढ़ गई.

उनके बारे में जानने की लोगों की दिलचस्पी का आलम यह है कि उनकी वेबसाइट पुरस्कार की घोषणा के पाँच मिनट के भीतर ही क्रैश हो गई.

पुरस्कार की घोषणा के चंद मिनटों के भीतर ही कैलाश सत्यार्थी ट्विटर पर टॉप ट्रेंड्स में भी कुछ देर शामिल रहे.

हालांकि 'नोबेल पीस प्राइज़' और 'इंडियन एंड ए पाकिस्तानी' ट्विटर ट्रेंड्स में शामिल हैं.

मोदी की बधाई

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Image caption कैलाश सत्यार्थी ने 26 वर्ष की आयु में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की नौकरी छोड़कर बच्चों के लिए काम शुरू कर दिया था

कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलने पर ट्विटर पर लोगों ने टिप्पणी की है.

शाम होते-होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफ़ज़ई को नोबेल जीतने पर बधाई दी. उन्होंने इसके लिए ट्विटर का सहारा लिया.

मोदी ने लिखा, "इस उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है. कैलाश सत्यार्थी ने ऐसे उद्देश्य के लिए पूरा जीवन लगाया है जो पूरी मानवता के लिए अहम है. मैं उनके प्रयासों के लिए उन्हें सलाम करता हूँ."

मोदी ने मलाला को भी बधाई देते हुए लिखा, "मलाला यूसुफ़ज़ई का जीवन धैर्य और साहस की यात्रा है. मैं उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार जीतने पर बधाई देता हूँ."

कैलाश सत्यार्थी को बधाई देते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, "यह मध्य प्रदेश और भारत के लिए गर्व का दिन है. विदिशा में पैदा हुए कैलाश सत्यार्थी को शांति का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं."

कैलाश सत्यार्थी नोबेल पुरस्कार की घोषणा से पहले मुख्यधारा की ख़बरों से भी पूरी तरह बाहर ही थे.

'एडवांस गूगल सर्च' करने पर पिछले एक साल के दौरान समाचारों में कैलाश सत्यार्थी बहुत कम बार ही नज़र आए. हालांकि हर बार बाल अधिकारों के संदर्भ में ही उनका हवाला दिया गया.

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