अब करुणा का ग्लोबलाइज़ेशन हो: सत्यार्थी

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शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारत के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने करुणा का वैश्वीकरण करने की बात कही है. पुरस्कार की घोषणा के बाद बीबीसी संवाददाता सुमिरन प्रीत कौर ने उनसे बात की. बातचीत के मुख्य अंश.

बाल मजदूरी एक बड़ा मुद्दा बनेगा इसमें कोई दो राय नहीं है. इस मुद्दे की पहचान हुई है. क्योंकि बाल मजदूरी के ख़िलाफ़ काम करने वाले किसी कार्यकर्ता को पहली बार ये पुरस्कार दिया गया है. इससे ये मुद्दा जनता, सरकार, मीडिया और कारपोरेट जगत की नज़र में आएगा. इससे हमारे आंदोलन को बड़ी ताक़त मिलेगी.

मुझे भारतीय होने पर बहुत गर्व है. ये सभी सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए बधाई की बात है लेकिन ये खुशी और बधाई तब पूरी होगी जब भारत के माथे से हम बाल मजदूरी के कलंक को पूरी तरह पोंछ देंगे.

भारत सैकड़ों बुराइयों की माँ हो सकती है लेकिन भारत लाखों समाधानों की माँ भी है. ये गाँधी और महात्मा बुद्ध की धरती है. इसमें पैदा होना मेरे लिए गर्व की बात है.

ग्लोबलाइज़ेशन

Image caption पाकिस्तान की छात्रा मलाला युसुफ़ज़ई ने कैलाश सत्यार्थी के साथ शांति का नोबेल साझा किया है.

मैं लगातार ये कहता रहा हूँ कि बाज़ार का वैश्वीकरण, सूचना तकनीक का वैश्वीकरण बड़ी चीज़े हैं जो पिछले कुछ सालों के दौरान हुई हैं लेकिन अब वक़्त आ गया है कि हम करुणा का वैश्वीकरण करें. करुणा की शुरुआत बच्चे से होती है. हर कोई अपने बच्चे को प्यार करता है. वो प्यार करने वाला दिल हमारे अंदर पैदा करें.

'ग्लोबलाइजेशन ऑफ़ कंपेशन फ़ॉर चिल्ड्रन' ये ही मेरा संदेश है. दक्षिण एशिया में बच्चों के शोषण और बच्चों की अशिक्षा बड़ी समस्याएं हैं. लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये है कि हमारे देश तनाव के कारण जो पैसा ख़र्च करते हैं उसकी ज़रूरत नहीं है. ये पैसा बच्चों पर, उनके विकास और शिक्षा पर ख़र्च होना चाहिए.

मैं मलाला को व्यक्तिगत तौर से जानता हूँ. मैं उनको फ़ोन करके कहूँगा कि अपना-अपना काम हम जोर-शोर से करेंगे लेकिन तुम अभी छोटी हो और तुम्हारे पास बहुत मौक़ा है. तुम हमारे साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए काम करो.

मैं ऐसी दुनिया बनाना चाहता हूँ जहाँ बच्चों शांति की आवाज़ सुने. सारी दुनिया की सरकारें फ़ेल हुई हैं तभी तो बहुत से बच्चे बाल मज़दूरी कर रहे हैं. जानवरों की तरह ख़रीदे बेचे जा रहे हैं.

हम इन बुराइयों से मिलकर लड़ेंगे.

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