डीएलएफ़ पर सेबी ने लगाई रोक

डीएलएफ़

बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ़ और इसके छह अधिकारियों पर शेयर बाज़ार में कारोबार करने पर रोक लगा दी है.

सेबी ने डीएलएफ़, इसके चेयरमैन केपी सिंह और चार अन्य अधिकारियों पर तीन साल की रोक लगाई है.

सेबी ने यह कार्रवाई डीएलएफ़ और मैनेजमेंट पर आईपीओ में जानकारी छिपाने का दोषी पाए जाने पर की है.

सेबी ने 43 पन्नों के आदेश में डीएलएफ़ को जानकारी छिपाने का दोषी पाया है.

डीएलएफ़ को झटका

डीएलएफ़ का आईपीओ 2007 में आया था.

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Image caption सेबी के फ़ैसले से डीएलएफ़ की रकम जुटाने की योजनाओं को धक्का लगेगा

डीएलएफ़ ने आईपीओ से 9,187 करोड़ रुपये जुटाए थे. सेबी के इस फ़ैसले से डीएलएफ़ की कर्ज़ कम करने की योजनाओं को भी झटका लगेगा.

डीएलएफ़ पर अभी क़रीब 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ है. इसके अलावा, डीएलएफ़ की आरईआईटी की लिस्टिंग भी नहीं हो पाएगी.

अप्रैल 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सेबी ने डीएलएफ़ के ख़िलाफ़ जाँच शुरू की थी.

सेबी जांच कर रहा था कि क्या डीएलएफ़ ने ख़ुद के और सभी सहायक कंपनियों के ख़िलाफ़ लंबित क़ानूनी मामलों की जानकारी आईपीओ दस्तावेज़ में दी है या नहीं.

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