पाक: मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ याचिका मंज़ूर

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को सुनवाई के लिए मंज़ूर कर लिया है जिसमें मौत की सज़ा का क़ानून ख़त्म करने की मांग की गई है.

याचिकाकर्ता बैरिस्टर ज़फ़रउल्लाह ख़ान ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने यह याचिका 2011 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल की थी, पर ग़लतफ़हमी और आपत्तियों के कारण इसे सुनवाई के लिए अब तक मंज़ूर नहीं किया गया था.

"उन्हें ग़लतफ़हमी थी कि इस बारे में पहले याचिका दायर की जा चुकी है. 2008 में अख़बारों ने लिखा था कि सरकार ने सात हजार लोगों की मौत की सज़ा को उम्रक़ैद में तब्दील कर दिया है. इसका संज्ञान लिया गया और अदालत का मानना था कि जब एक याचिका पहले से दायर हो, तो दूसरी पर सुनवाई नहीं हो सकती."

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में याचिका मंज़ूर हुई

उन्होंने बताया कि अब सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में अपनी आपत्तियों को ख़ारिज किया है और मौत की सज़ा से जुड़ी उनकी एक अन्य याचिका पर सुनवाई के लिए एक बड़ी बेंच बनाई गई है.

ज़फ़रउल्लाह मौत की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ हैं.

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी इस बारे में सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है. पाकिस्तान में आठ हज़ार लोग ऐसे हैं जिन्हें मौत की सज़ा मिली हुई है.

पाकिस्तान में सिर्फ़ राष्ट्रपति ही किसी की मौत की सज़ा को माफ़ कर सकते हैं.

(बीबीसी हिंदी केएंड्रॉएड ऐपके लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं)

संबंधित समाचार