जब दौड़ने वाले हाफ मैराथन में रास्ता भटक गए

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बैंगलोर में आयोजित एक हाफ़ मैराथन दौड़ में शामिल शीर्ष धावकों को एक अनजान रास्ते पर चार किलोमीटर दौड़ने के बाद पता चला कि वे रास्ता भटक गए हैं.

रविवार को हुई इस हाफ़ मैराथन के विजेता को एक लाख रुपए का पुरस्कार मिलना था.

सिंगापुर में हुई 2010 की एशियन जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल विजेता इंद्रजीत पटेल ने बीबीसी हिंदी से कहा, "किसी को पता नहीं था कि हमको कब और कहां से मुड़ना है."

उन्होंने कहा, "आयोजकों की गाड़ियों को भी रास्ते की जानकारी नहीं थी. जब हम चार किलोमीटर अतिरिक्त दौड़ गए तब हमें लगा कि यह दौड़ के लिए निश्चित रास्ता नहीं है."

इंद्रजीत ने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि मैं 21.7 किलोमीटर की दूरी एक घंटे तीन मिनट में पूरा कर लूंगा क्योंकि मैंने दिल्ली में होने वाली सीआरपीएफ़ की हाफ़ मैराथन में एक घंटे 13 मिनट का वक़्त लिया था."

नाराज़गी

इस घटना से नाराज़ पटेल ने कहा, "सौभाग्य से मुझे एक स्थानीय टीवी चैनल की गाड़ी मिल गई. उन्होंने मुझे मैराथन शुरू होने वाली जगह पर मुझे उतार दिया. सुरेश कुमार पटेल और सोजी मैथ्यू (एशिया मेडल विजेता) को सुबह दौड़ने वाले लोगों से मेट्रो पहुंचने के लिए 20 रुपए उधार मांगने पड़े."

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Image caption बैंगलोर हॉफ़ मैराथन के धावक रास्ता भटक गए और लोगों से रुपए उधार लेकर मेट्रो तक पहुंचे.

उन्होंने कहा, "आयोजकों का जवाब बड़ा अजीब था. सॉरी बोलना पर्याप्त नहीं है. हम पुरस्कार के लिए नहीं दौड़ रहे थे."

इस दौड़ का आयोजन करने वाली संस्था के निदेशक नागराज अडिगा ने कहा, "हम मामले की जाँच कर रहे हैं. हम दौड़ जीतने पर जितनी राशि मिलनी थी उतनी राशि क्षतिपूर्ति के रूप में देने के फ़ैसले पर विचार कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "हमने पहली बार किसी दौड़ का आयोजन किया है. हमारे समूह में बैंगलोर के धावक हैं. हमने इस दौड़ को आयोजित करने के लिए रनर्स फ़ॉर लाइफ़ की मदद ली थी, जो पिछले दस सालों से दौड़ का आयोजन करता रहा है."

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