बसपा: राष्ट्रीय दल की मान्यता ख़तरे में

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भारतीय चुनाव आयोग देश के तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की राष्ट्रीय दल की मान्यता रद्द कर सकता है.

आयोग भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने को कह चुका है.

वहीं अजित सिंह के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक दल की क्षेत्रीय दल की मान्यता भी अब ख़तरे में है.

इन दलों की मान्यता पर पुनर्विचार की वजह है पिछले लोकसभा चुनाव में इन सभी दलों के वोट प्रतिशत और सीटों में आई कमी.

सलमान रावी की रिपोर्ट

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लोकसभा चुनावों में कई दलों के ख़राब प्रदर्शन के बाद अब चुनाव आयोग इन दलों की राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल के रूप में मान्यता पर फ़ैसला लेने को तैयार है.

आयोग के प्रधान सचिव केएफ़ विल्फ्रेड ने बीबीसी को बताया है कि सभी दलों को तीन महीने पहले ही नोटिस भेजा गया था और उनसे अपना पक्ष रखने को कहा था.

केएफ विल्फ्रेड का कहना है कि राष्ट्रीय दल की मान्यता पाने के लिए किसी राजनीतिक दल को लोकसभा में कम से कम तीन राज्यों में कुल 11 सीटें और छह प्रतिशत वोट मिले हों.

इन सभी दलों ने चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में महाराष्ट्र और हरियाणा में विधान सभा के चुनाव तक की मोहलत मांगी थी.

विल्फ्रेड कहते हैं कि चूँकि दोनों ही राज्यों में अब विधान सभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं, इसलिए अब फैसला सुनाने का वक़्त भी आ गया है.

आयोग के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों के भी कुछ-एक राजनीतिक दल ऐसे हैं जिनकी क्षेत्रीय दल की मान्यता समाप्त हो सकती है.

राष्ट्रीय दल की मान्यता रद्द हो जाने पर सीपीआई, बसपा और एनसीपी क्षेत्रीय दल माने जाएंगे.

पार्टियों का जवाब

सीपीआई के सचिव एसएस भुसारी का कहना है कि उनकी तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिल चुका है और उसने अपना पक्ष भी रख दिया है.

वो कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि पिछले आम चुनाव में उनकी पार्टी को सिर्फ़ एक ही सीट मिली और अब उनकी पार्टी चुनाव आयोग के फ़ैसले को मानने के लिए तैयार है.

बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या कहते हैं कि उनका दल उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल है इसलिए क्षेत्रीय स्तर पर उसकी मान्यता बरक़रार है.

मौर्या के अनुसार उनकी पार्टी ने जवाब देने के लिए आयोग से अगले आम चुनाव तक का वक़्त माँगा है.

दलों की मान्यता

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Image caption राष्ट्रीय दल की मान्यता के बाद सीपीआई, बसपा और एनसीपी क्षेत्रीय दल होंगे.

पिछली लोकसभा में सीपीआई की चार सीटें थीं. मगर 2014 के लोकसभा के चुनाव में उसे सिर्फ एक सीट ही मिल पाई.

आम चुनावों में पार्टी को सिर्फ 0.8 फ़ीसदी वोट ही मिले. यही हाल बसपा का भी रहा जिसे इस बार लोकसभा के चुनाव में एक सीट भी नहीं मिली.

एनसीपी का वोट प्रतिशत भी कम हुआ और उसकी सीटें नौ से घटकर छह पर आ गई हैं.

आयोग का कहना है कि जिन दलों को नोटिस भेजी गई थी उन्हें अब अपना पक्ष रखना है. सुनवाई पूरी होने के बाद आयोग इन दलों की राष्ट्रीय मान्यता रद्द करने पर फ़ैसला देगा.

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