फ़्रांसीसी फ़िल्मकार 'निशाने' पर

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अंडमान और निकोबार प्रशासन ने दो फ़्रांसीसी फ़िल्मकारों और उनके चार स्थानीय सहयोगियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

फ़्रांसीसी फ़िल्मकारों पर अतिसंवेदनशील जारवा जनजाति की बस्ती में गैरक़ानूनी प्रवेश और उन पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का आरोप है.

जारवा जनजाति की बस्तियों और इलाक़ों में बाहरी लोगों का आना प्रतिबंधित है.

डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म "ऑर्गैनिक जारवा" से जुड़ा ये केस तब सामने आया, जब फ़िल्म निर्देशकों ने इसका ट्रेलर अपनी वेबसाइट पर जारी किया.

शिकारी

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Image caption फ्रांसीसी फिल्मकारों पर जारवा जनजाति की प्रतिबंधित बस्तियों में जाकर फिल्मांकन करने का आरोप है.

अंडमान प्रशासन ने फ़िल्मकारों को उनकी वेबसाइट और फ़ेसबुक पेज से वीडियो और तस्वीरें हटाने का भी नोटिस जारी किया है.

साथ ही साथ, प्रशासन ने जारवा के वीडियो रिलीज़ पर भी रोक लगा दी है. फिल्म मई 2015 में रिलीज होनी थी.

प्राथमिकी के अनुसार, अभियुक्तों का बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के जारवा जनजाति के लोगों का वीडियो बनाना या उनसे बातचीत करना अंडमान और निकोबार द्वीप के नियम-क़ायदे (आदिवासी जनजाति संरक्षण कानून) का उल्लंघन है.

आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि "ऑर्गैनिक जारवा" डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले फ़्रांसीसी निदेशक एलेक्ज़ेंडर डेरेम और क्लेयर बिलवर्ट ने प्रतिबंधत इलाक़े में प्रवेश के लिए करेन समुदाय के स्थानीय शिकारियों की मदद ली.

फ़िल्मकारों के ख़िलाफ़ आदिवासी जनजाति संरक्षण (पैट) अधिनियम 1956, आईटी अधिनियम और विदेशी नागरिक संशोधन अधिनियम 2004 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

प्रतिबंधित इलाक़ा

Image caption जारवा जनजाति की बस्तियों और इलाक़ों में बाहरी लोगों का आना प्रतिबंधित है.

अंडमान निकोबार प्रशासन सचिव (आदिवासी कल्याण) जी. तेवा नीति दास का कहना है कि ये फ़्रांसीसी फ़िल्मकारों की ओर से किया गया गंभीर उल्लंघन है.

वे बताते हैं कि फ़िल्मकारों ने डॉक्यूमेंट्री फ़िल्माने के लिए प्रतिबंधित इलाक़े में प्रवेश किया.

उन्होंने यह भी बताया कि पिछले तीन साल से डॉक्यूमेंट्री का फ़िल्मांकन चल रहा था.

फ़िल्मकारों की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक़, फ़िल्मकार जारवा बस्ती में तीन साल में कई बार गए और उन लोगों से मिले.

वर्तमान में जारवा जनजाति समूह की आबादी 400 से अधिक है. वे दक्षिणी अंडमान की कंसतांस खाड़ी से मध्य अंडमान के लुई इनलेट खाड़ी तक फैले इलाक़े में एक भू-भाग में रहते हैं.

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