दिल्ली में सरकार गठन पर केंद्र को पड़ी डांट

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दिल्ली में सरकार के गठन पर हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में राष्ट्रपति शासन हमेशा नहीं रह सकता.

इस साल फरवरी में आम आदमी पार्टी की सरकार के इस्तीफे के बाद से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा है.

इससे पहले, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राष्ट्रपति ने उपराज्यपाल को सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के ढीले-ढाले रवैये की आलोचना की और कहा कि सुनवाई के दिन सरकार कभी एक, तो कभी कभी दूसरा बयान देती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल को फ़ैसला करने में 5 महीने का समय नहीं लगना चाहिए था.

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उधर दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

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Image caption अब उपराज्यपाल नजीब जंग पर टिकी निगाहें

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि जब उप राज्यपाल उसे ऐसा कोई मौका देंगे, तभी वो इस बारे में विचार करेंगी.

70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में तीन सीटें अभी रिक्त हैं.

आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसौदिया ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी को यह बताना चाहिए कि वो 67 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 34 विधायकों का आंकड़ा कहां से जुटाएगी, जबकि उसके पास सिर्फ 29 विधायक हैं.

वहीं, भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि अगर उपराज्यपाल की तरफ से ऐसा न्यौता दिया जाता है तो पार्टी में इस पर विचार होगा.

लेकिन कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का मौका नहीं मिलना चाहिए.

दिल्ली विधानसभा में इस समय भाजपा गठबंधन के 29, आम आदमी पार्टी के 27 और कांग्रेस के 8 विधायक हैं. इसके अलावा दो विधायक निर्दलीय और एक जदयू का है.

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