टीपू, शाहजहां के आभूषण न्यूयॉर्क में..

भारत के दुर्लभ नायाब गहने इमेज कॉपीरइट AFP

न्यूयॉर्क के 'मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट' में मंगलवार से एक अनोखी प्रदर्शनी शुरू हुई.

प्रदर्शनी में भारत के कुछ 60 दुर्लभ और विलक्षण आभूषणों को कला प्रमियों के लिए पेश किया जा रहा है.

संग्रहालय में 'ट्रेजर्स फ़्रॉम इंडिया' नाम से शुरू हुई इस प्रदर्शनी में शेख हमद बिन अब्दुल्ला अल-थानी के कलेक्शन रखे गए हैं.

अब्दुल्ला अल-थानी का ये कलेक्शन दिखाता है कि भारतीय गहनों ने मुगल काल से 20वीं सदी तक का सफ़र कैसे तय किया.

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संग्रहालय के निदेशक पी कैंपबेल ने बताया कि यह कलेक्शन "पेरिस की शिल्पशालाओं से लेकर भारत के मुगल कार्यशालाओं तक के परंपरागत शिल्प कौशल से तराशी गई खूबसूरती और नफासत को ख़ुद में समेटे हुए है."

प्रदर्शनी में मणियों से जड़ा बाघ का सिर रखा हुआ है. यह ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ उठ खड़े होने वाले भारतीय राजा टीपू सुल्तान के सिंहासन का बाघ है.

बाघ के शरीर के ऊपरी हिस्से में कुंदन में हीरे, माणिक और पन्ने, जो भारतीय रत्न आभूषण का हिस्सा हैं, जड़े हुए हैं.

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मुगलकाल से जुड़ी इस कला प्रदर्शनी में एक भव्य कटार शामिल है. इसका मूठ खासकर मुगल सम्राट जहांगीर के लिए तैयार किया गया था.

बाद में जहांगीर के बेटे शाहजहां के लिए कटार को फिर धार दी गई.

शाहजहां ने दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल बनवाया था. यह मूठ लघु मूर्तिकला शैली, यूरोपीय शैली, का नमूना है.

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इसके अलावा इस प्रदर्शनी में 1875-1900 काल की उत्तर भारतीय शैली की पगड़ियों पर सजने वाले आभूषणों को भी जगह दी गई है. इनमें परंपरात डिजाइनों से लेकर आधुनिक पश्चिमी शैली की पगड़ियां शामिल हैं.

पगड़ी पर जड़े जाने वाले आभूषणों में एक सजावटी पिन है जिस पर पन्ना जड़ा है. यह पगड़ी किसी महाराज के सिर की शोभा रही है.

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मुगलकाल के कीमती रत्नों से जड़े हार अपनी अलग ही छटा बिखेरते हैं.

इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी में 17वीं सदी से लेकर 18वीं और 19वीं सदी के कीमती और दुर्लभ गहने शामिल किए गए हैं.

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