बैंगलुरु होने से 'ब्रैंड' बैंगलोर पर असर?

इन्फोसिस कंपनी के कर्मचारी इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत की तकनीकी राजधानी कहे जाने वाले बैंगलोर का नाम शनिवार से आधिकारिक रूप से बैंगलुरु हो जाएगा, यह नाम 1799 में अंग्रेजों के आने और नाम बदलने से पहले ही अस्तित्व में था.

कर्नाटक में बैंगलौर के साथ-साथ 11 अन्य शहरों के नाम भी बदले जाएंगे.

आठ साल पहले राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को इन शहरों का नाम बदलने (पुराने नाम रखने) की सिफ़ारिश की थी.

बहुत से लोग बैंगलौर के नए नाम (बैंगलुरु) से अब परिचित हो गए होंगे, क्योंकि पिछले कुछ सालों से इस नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

लेकिन आधिकारिक तौर पर होने वाले बदलाव से लोगों के बीच चर्चा हो रही है कि भारत का सॉफ़्टवेयर हब माने-जाने वाले बैंगलुरु 'ब्रैंड' पर इसका क्या असर होगा.

इमरान कुरैशी की पूरी रिपोर्ट

इमेज कॉपीरइट AFP

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर और अर्थशास्त्री नरेंद्र पाणि ने बीबीसी हिंदी से कहा, "कुछ समय के लिए इसका थोड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है, लेकिन यह उसी हद तक होगा जिस हद तक इसे आईटी इंडस्ट्री में एक 'ब्रैंड 'का दर्ज़ा हासिल है. देखना होगा कि आईटी इंडस्ट्री कितनी जल्दी नए नाम के साथ ढल सकती है."

प्रोफ़ेसर पाणि कहते हैं, "जब 'ब्रैंड' का नाम बदलता है तो उसकी वैल्यू में कुछ कमी आती है. हम भविष्य में देखेंगे कि सॉफ्टवेयर जगत इससे कैसे निपटता है."

बैंगलौर बनाम बैंगलुरु

लेकिन'ब्रैंड'सलाहकार हरीश बिजूर कहते हैं, "भारत में पिछले 30 सालों में कुछ शहरों के नाम बदले गए हैं. इस नाम में होने वाला हर बदलाव समसामयिक है."

इमेज कॉपीरइट AFP

वो कहते हैं, "कुछ समय के बाद आपको ऐसे बुज़ुर्ग मिलेंगे जो इसे बैंगलौर ही कहेंगे, जबकि नौजवान लोग इसे बैंगलुरु कहेंगे. जैसे चेन्नई को अभी भी पुरानी पीढ़ी के लोग मद्रास ही कहते हैं."

'बैंगलुरु, बैंगलौर और बैंगलुरु' पुस्तक के लेखक प्रोफ़ेसर पाणि भी हरीश बिजूर की इस बात से सहमत हैं कि स्थानीय लोग बैंगलौर को बैंगलुरु कहकर ही बुलाते हैं.

नाम बदलना जरूरी था?

क्या इस शहर का नाम 200 साल बाद बदलना वाकई ज़रूरी था?

Image caption विशेषज्ञों के अनुसार बैंगलौर का नाम बैंगलुरु करने से थोड़ा फ़र्क़ पड़ सकता है.

इस सवाल के जवाब में प्रोफ़ेसर पाणि कहते हैं कि स्थानीयता की भावनाओं के उभार के माहौल में ऐसा माना जाता है कि शहर को स्थानीय लोगों की सोच के अनुरूप ही शहर की छवि होनी चाहिए.

सबसे ख़ास बात है कि यह नाम बदलने से ज़्यादा विभिन्न भाषाओं में नाम की एकरूपता लाना है.

कर्नाटक के जिन अन्य शहरों के नाम बदले जा रहे हैं उनके नए नाम इस तरह होंगेः मैसुरु (मैसूर), मैंगलुरु (मंगलौर), बल्लारी (बेल्लारी), विजयपुरा (बीजापुर), चिक्कामैंगलुरु (चिकमंगलूर), कालबुर्गी (गुलबर्गा), शिवामोग्गा (शिमोगा), होसापेते (होसपेत), हुब्बाली (हुबली), टुमकुरु (टुमकुर) और बेलागावी (बेलगौम).

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार