पृथ्वी थिएटर फ़ेस्टिवलः नाटक से सर्कस तक

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Image caption नसीरुद्दीन शाह 'आइंस्टाइन' नाटक में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं.

विश्व के जाने-माने वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन को अपने काम से निराशा हो सकती है कभी? क्या असफलताओं का डर उन्हें भी घेरे रखता था?

ऐसे कई सवालों के जवाब देने के लिए आइंस्टाइन ख़ुद आपसे बात करेंगे. दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह इस साल इसी नाम के नाटक में आइंस्टाइन के किरदार में दिखेंगे.

'आइंस्टाइन' के प्रीमियर के साथ इस साल के पृथ्वी थिएटर फ़ेस्टिवल 2014 का प्रारंभ होगा. कनाडाई ड्रामा लेखक गेब्रियल ईमैन्युअल के इस नाटक का निर्देशन भी नसीरुद्दीन शाह ने ही किया है.

बुधवार से शुरू होने वाले पृथ्वी थिएटर फ़ेस्टिवल में इस साल 25 धुआंधार परफ़ॉर्मेंस होंगे. 12 दिनों तक चलने वाले इस फ़ेस्टिवल में 13 नए प्रोडक्शंस उतने ही ग्रुप पेश करेंगे.

इसके अलावा अकुस्टिक जैमिंग सेशन्स, फ्रिन्ज थिएटर एक्ट्स और थिएटर के जाने पहचाने चेहरों के साथ बातचीत के मौक़े भी रखे गए हैं.

सीधी बात

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पृथ्वी थिएटर, जुहु के ट्रस्टी कुनाल ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "कुछ नए एलिमेंट्स इस साल फ़ेस्टिवल का हिस्सा हैं. जैसे इस बार फ्रिन्ज थिएटर के ज़रिए हम एक नया प्लेटफॉर्म खड़ा कर रहे हैं. इस प्रयोगात्मक थिएटर के ज़रिए कलाकार परफ़ॉर्मेंस के अलावा दर्शकों से सीधी बात भी कर पाएंगे."

फ्रिन्ज थिएटर में प्रवेश निःशुल्क है. यहां आप 'फॉल्स 2-11 (क्लर्क एन्ड जोय)', 'क्रेप्स लास्ट टेप (सेम्युअल बेकेट)' और 'सॉन्ग्स ऑफ दी स्वांस (आज़ाद हुसैन)' जैसे नाटक भी देख सकते हैं.

फ़ेस्टिवल में होने वाले नाटको में यात्री ग्रुप का 'हिरोइन बनूंगी मैं', होशरुबा रेपेर्टोरी का 'दास्तान-ए-चौबुली', एकजुट का 'रोशनी की सदा', इप्टा की 'दरिंदे...दी विलंस' वग़ैरह शामिल हैं.

परिवार का मनोरंजन

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'स्टेज टॉक सेशंस' में परेश रावल, कुमुद मिश्रा, शेरनाज़ पटेल, ओम पुरी, रोहीनी हटंगड़ी संवाद रचेंगे. इसके इलावा फ़ेस्टिवल में संगीत को जोड़ते हुए अकुस्टिक, जैज़ और सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा इंडिया के कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं.

पहली बार दो बहुत अलग तरीक़े के सर्कस एक्ट्स फ़ेस्टिवल का हिस्सा हैं, जिसमें एक्रोबेटिक्स के करतब दिखाता फ्रैंच निओ सर्कस होगा तो साथ में जोकरों की मस्ती और एक्रोबेट्स के कमाल का मिश्रण भारतीय रैम्बो सर्कस भी पूरे परिवार का मनोरंजन करने के लिए अपने खेल दिखाएंगे.

थिएटर की दुनिया

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कई वर्षों से इस फ़ेस्टिवल से एक या दूसरे तरीक़े से जुड़ते आए अभिनेता, लेखक, निर्देशक मकरंद देशपांडे ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, "फ़ेस्टिवल तो कई होते हैं लेकिन पृथ्वी थिएटर फ़ेस्टिवल की बात ही कुछ और है. यहां तो जैसे त्योहार का सा माहौल बन जाता है."

उन्होंने कहा, "नए पुराने अभिनेता, लेखक, निर्देशक और दर्शक भी इस फ़ेस्टिवल को साथ मिलकर मनाते हैं. यहां थिएटर की दुनिया में अभी बह रही धारा को देखा जा सकता है तो लोककला का रस भी महसूस होता है."

वे कहते हैं, "मैंने एक कलाकार के तौर पर इस फ़ेस्टिवल से बहुत कुछ पाया है. मैं आज जो भी हूं, शायद इसी एक्सपोज़र की वजह से हूं. यह कहने में कोई भी अतिशयोक्ति नहीं है."

नाटक और संवाद

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पृथ्वी थिएटर फ़ेस्टिवल जैसे थिएटर को चाहने वाले मित्रों की लंबी मुलाक़ातों की वजह बन जाता है. सत्यदेव दुबे हमेशा कहा करते थे, "नाटक के बाद भी डॉयलॉग तो चाहिए."

पृथ्वी थिएटर फ़ेस्टिवल, इसी वाक्य की वास्तविकता है. 'मान लो' नाटक का चौथा अंक लोगों से मेल-मिलाप में ही परफॉर्म होता है.

सिनेमा और टेलीविज़न की भीड़ में यह फ़ेस्टिवल थिएटर का मूल्यांकन करने वाला एक कोना बनता है जिसकी शुरुआत मुंबई में बस होने को है और फिर थिएटर का यह जश्न दो हफ़्ते तक चलेगा.

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