कश्मीरः सेना की यूनिट पर केस दर्ज

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भारत प्रशासित कश्मीर में प्रशासन ने भारतीय सेना की एक यूनिट पर सातवीं कक्षा के एक छात्र समेत दो लड़कों की हत्या का मामला दर्ज किया है.

सूत्रों के अनुसार सोमवार रात एक नाके पर हुई गोलीबारी के मामले में जिस यूनिट के जवानों ने ये कार्रवाई की थी, उन्हें चौकी से हटा लिया गया है.

जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया, "जांच अभी जारी है लेकिन शुरुआती पड़ताल से लगता है कि जब सैनिकों ने उस गाड़ी को रुकने को कहा, जिसमें पांच लड़के सवार थे, तो वह एक लैंपपोस्ट से टकरा गई."

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अधिकारी के अनुसार, "दरअसल दूसरी दिशा से तेज रफ्तार में एक गाड़ी आ रही थी और लड़के कार को ठीक से निंयत्रित नहीं कर पाए. इसके बाद सैनिकों को उनकी मदद करनी चाहिए थी लेकिन इसके बजाय उन्होंने गोलियां चला दीं".

'बंद'

इस हादसे में दो लड़कों 14 वर्षीय बुरहान फैसल और 21 वर्षीय मेराजुद्दीन की मौत हो गई और दो अन्य ज़ाहिद और शाकिर घायल हो गए. पांचवां लड़का बासिम सुरक्षित बच गया.

जांच का आधार बासिम और दो घायल लड़कों की गवाही ही है.

इस बीच अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारतीय सैन्य अधिकारियों से आधिकारिक जांच में सहयोग को रहा है.

इस हत्याओं के बाद पूरी घाटी में गुस्से की लहर दौड़ गई और अलगाववादियों ने हत्याओं के विरोध में पूरी घाटी में बंद का आयोजन किया.

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नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने इन हत्याओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और मांग की है कि भारतीय सेना से उस कानूनी सरंक्षण को छीन लिया जाए जिसके चलते सैनिकों को नागरिक अदालतों में कानूनी कार्रवाई से छूट मिलती है.

आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट जिसे सामान्यतः एएफएसपीए कहा जाता है लंबे वक्त से भारत समर्थक और भारत विरोधी समूहों के बीच राजनीतिक मांग का विषय रहा है.

इस घटना के बाद पूरी तरह बंद और सेना के प्रतिबंधों के चलते कश्मीर घाटी के ज़्यादातर इलाक़ों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. गुस्साए युवा कई जगह पुलिस और अर्धसैनिक बलों से उलझ गए लेकिन किसी मौत की ख़बर नहीं है.

'जांच'

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सेना के अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया है कि सैन्य जांच जल्द ही पूरी हो जाएगी और दोषी सैनिकों को छोड़ा नहीं जाएगा.

सेना के एक अधिकारी ने कहा, "हमने पहले ही आरोपी सिपाहियों को चौकी से हटा दिया है".

मानवाधिकार संगठनों ने जम्मू और कश्मीर में तैनात सैन्य बलों को हासिल कानूनी सरंक्षण के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है.

नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता रजा मुज़्फ़्फ़र ने कहा, "जब कश्मीर में हथियारबंद विद्रोह अपने चरम पर था तब सेना को यह कानूनी सरंक्षण दिया गया था ताकि वह किसी को भी संदेह की बिना पर गिरफ़्तार कर सके या मार सके."

"अब भारत सरकार शांति को देख रही है और चुनाव करवाती है लेकिन यह कानून हत्या करने का लाइसेंस बन गया है. यह कानून ख़त्म होना चाहिए. हम राज्य भर में धरने देंगे ताकि यह निर्दयी कानून हटाया जाए."

भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली पहले ही इन हत्याओं पर खेद जता चुके हैं और वादा किया है कि अभियुक्तों के खिलाफ़ जल्द सुनवाई की जाएगी.

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